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इसे क्या कहें प्राश्चित या मक्कार राजनीति
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बिलासपुर, 6 जुलाई 2023। सीधी की निर्लज्ज घटना जिसके जीते हम पर भी पड़े थे आज इस घटना का जो रिएक्शन मध्य प्रदेश सीएम हाउस में देखा गया उसका वीडियो देखकर दो चीज याद आई । पहला घर वापसी कार्यक्रम का नया स्वरूप और दूसरा भविष्य में होने वाले मूत्र विसर्जन कांड से बचने के उपाय।
मध्य प्रदेश के सीएम ने सीधी कांड के पीड़ित के साथ जो व्यवहार किया वह किसी भी स्तर पर प्राश्चित नहीं कहा जा सकता, पीड़ा उस कांड के गुप्त भोगी आदिवासी युवक की अकेले की नहीं है सीएम साहब किस-किस का पैर धोएंगे पैर धोना पैर पूजना किसकी परंपरा है किसके धोए जाते हैं किसके पूजे जाते हैं इस पर चर्चा करना अनावश्यक हो जाएगा। पर पिछले कुछ सालों से पैर धोकर घर वापसी अभियान कौन चला रहा है सबको पता है मध्य प्रदेश के सीएम ने एक बार फिर से उस अभियान को गति दे दी। यूट्यूब सहित तमाम टीवी चैनलों में मध्य प्रदेश के सीएम का कथित प्राश्चित कार्यक्रम प्रमुखता से प्रसारित किया जा रहा है। इस वीडियो के आखरी भाग में सीएम साहब पीड़ित आदिवासी युवक को एक मूर्ति देते भी दिखाई दे रहे हैं इसे देखकर तुरंत उस पिक्चर पीके की याद आती है जिसमें पिक्चर का मुख्य पात्र आम जनता की पिटाई से बचने के लिए अपने दोनों गालों पर दैवीय प्रतीक लगा लेता है। और इसे सेल्फ डिफेंस का नाम देता है लगता है कि एमपी के सीएम साहब सीधी के पीड़ित युवक को यही संदेश दे रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटना नहीं होगी कि गारंटी न देकर उससे बचने का पी के उपाय बता रहे हैं। एमपी के मुख्यमंत्री जिस ताबड़तोड़ तरीके से सीधी कांड के प्रभाव से बचने के उपाय कर रहे हैं उससे यही पता चलता है कि सत्ता को होने वाले नुकसान की चिंता हो गई है अन्यथा इसी तर्ज पर देश के मुखिया ने महिला रेसलर को अपने आवाज क्यों नहीं बुला लिया।


