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गुरुदेव का यह कैसा सम्मान, शहर की संवेदना का क्या कहें
- By 24hnbc --
- Saturday, 26 Mar, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर 26 मार्च 2022। क्या यह नोबेल पुरस्कार विजेता के पीछे बिलासपुर में कोई वोट बैंक नहीं है या फिलहाल रविंद्र नाथ टैगोर की मूर्ति कि कोई उपयोगिता बिलासपुर के जनप्रतिनिधियों को दिखाई नहीं देती अन्यथा ऐसा कौन सा कारण है कि राष्ट्रीय के विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित राष्ट्रीय गीत के रचयिता के मूर्ति के नीचे का स्टैंड और उस पर लिखी इबादत एक बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है चौराहे पर सीडी रेलिंग भी टूट फूट गई है बिलासपुर के रेलवे परिक्षेत्र सरकंडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में बांग्लाभाषी निवासरत है और इनकी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा ने केवल बिलासपुर को नहीं छत्तीसगढ़ को भी शीचा है उसके बावजूद वर्तमान व्यवस्था को यह दिखाई नहीं देता बिलासपुर के रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर एक पर रविंद्र नाथ टैगोर के याद में एक स्थान भी आरक्षित है जिसकी रोज साफ सफाई होती है दूसरी ओर शिव टॉकीज, मामा भांजा तालाब के पास गुरुदेव कि इस मूर्ति के नीचे हालत इतनी खराब है कि इस मार्ग से अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति जिनकी दाढ़ी भी गुरुदेव की याद दिलाती है रोज निकलते थे क्या इस रोड से कभी महापौर नहीं निकले दैनिक भास्कर के कई पत्रकार इसी मार्ग से निकलते हैं इतना ही नहीं लाखों का किताबों का सौदा करने वाले कोचिंग संस्थानों के करोड़पति शिक्षक महाविद्यालय के प्राचार्य इसी मार्ग से निकलते हैं पार्षद नेता प्रतिपक्ष नगर निगम जिले के कई एमएलए इसी मूर्ति को देखते हुए जानबूझकर अनजान बन कर निकल जाते होंगे शहर में कई स्वच्छता, नवरत्न कई एनजीओ के छपास रोगी कई महिला समाजसेवीकाए जो हजारों का चश्मा पहनकर सोशल मीडिया पर रोज उछलते कूदते हैं किंतु उन सबको गुरुदेव का यह मूर्ति वाला स्थान दिखाई नहीं देता इससे ज्यादा लिखना स्मार्ट सिटी न्यायधानी बिलासपुर को शर्मिंदगी देने वाला होगा।


