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अंतिम संस्कार में भी लोगों ने ढूंढ लिए अवसर

24 HNBC. बिलासपुर

बिलासपुर। आपदा ने उन लोगों की मति मार दी है जिनके ऊपर नैतिकता का भार है। देह को वैदिक परंपरा से दाह देने को भी संस्कार कहा जाता है। और यह हिंदू मान्यता के 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार है। आपदा में अवसर ढूंढने वालों ने इसे भी नहीं छोड़ा स्थानीय निकाय हर क्षेत्र का दाम तय कर के हट जाती है पालन हो रहा है या नहीं कोई नहीं देखता। बस यही से देश का नागरिक कब उपभोक्ता बन गया और अब बेचारा बन रहा है। 
          कल ही एक देह को उसके परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए नहीं लिया तब बिलासपुर के महापौर ने यह जिम्मेदारी निभाई इसके पीछे लूट तंत्र ही हैं। साडे 3 क्विंटल लकड़ी के स्थान पर 2 क्विंटल लकड़ी का दोगुना दाम मृत देह को मुक्तिधाम पहुंचाने का 5 हजार एक पीपी कीट 1 हजार से 15 सो रुपए लुट नहीं तो क्या है ?इसे समाज के पतन के आहट ही समझा जाना चाहिए क्योंकि अंतिम संस्कार अब लूट का संस्कार हो गया है और बिलासपुर में यह काम आम है।