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महिलाओं को चार बच्चे पैदा करने की सलाह सोची समझी खतरनाक साजिश है पितृ सत्तात्मक सोच की
- By 24hnbc --
- Friday, 01 May, 2026
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बिलासपुर, 2 मई 2026।
देश में चल रही सनक की राजनीति को सुने और समझे तो यह पता चलता है कि समाज के कथित पथ प्रदर्शक असल में आम नागरिकों को किस तरह भीड़ तंत्र के स्थान पर भेड़ तंत्र बना रहे हैं। राजनीति और महिला समर्थकों के बीच छाए हुए एक बुंदेलखंडी संत इन दोनों देश की सनातनी महिलाओं से एक अजीब डिमांड कर रहे हैं। चार बच्चे पैदा करो और एक बच्चा आरएसएस को दे दो । इनसे मिलते जुलते शब्दों में यही इच्छा अपंजीकृत संस्था के शिखर पुरुष ने भी व्यक्त की अधिक बच्चा पैदा करने की सलाह के पहले हिंदी पट्टी में सत्ता में बने रहने या सत्ता में आने के लिए एक राजनीतिक दल विशेष ने 1000 से ₹3000 तक प्रतिमा महिलाओं को नगद पैसा देने की योजना दी गई। छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस योजना का नाम महतारी वंदन योजना है। अर्थात वंदना महिला की नहीं है महतारी की है । महतारी अर्थात मां इन सब के पूर्व देश के आदर्श राज्य गुजरात में किराए की कोख सेरोगेसी मदर का व्यवसाय खूब चला और बीबीसी जैसी अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी ने अपनी शोध परख न्यूज़ में बताया है कि एक सेरोगेसी मदर 8 से 10 लाख में बच्चा पैदा करके दी। यह बच्चे विशेष तौर पर विदेशी दंपति ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका को दिए गए। यह वो समय था जब भारत में सेरोगेसी मदर के संबंध में कोई स्पष्ट कानून नहीं था अब है।
हम फिर से लौटते हैं चार बच्चा पैदा करने और एक बच्चा आरएसएस को देने पर, क्या 1 से 3000 महीने के एवज में कोई महिला बुंदेलखंडी संत की वाणी पर चार बच्चे पैदा करेगी। एक तरफ गुजरात की महिलाओं ने 10 लाख रुपए आज से 10 वर्ष पहले में पैदा किया और उसे विदेशी नागरिक दंपति को दिया। तो आज के बाजार मूल्य पर यदि संत की वाणी पर कोई महिला तीन बच्चे पैदा कर कर पहले घर पर रखे और चौथे को दें तो क्या मूल्य होगा। और इस मूल्य को बुंदेलखंडी संत देंगे क्या... हम महिलाओं का अपमान नहीं कर रहे हैं हम केवल हिंदी पट्टी को चेता रहे हैं कि वे किस तरह के भंवर जाल में फसे जा रहे हैं। यदि बाजार वाद की ही बात की जाए तो डिमांड और सप्लाई के आधार पर ही बाजार मूल्य तय होता है। महतारी वंदन योजना की शर्त को देखें तो यह योजना केवल विवाहित महिलाओं के लिए है। और नाम से स्पष्ट है कि सम्मान, वंदना केवल विवाहित मां महिलाओं का है। समाज के ऐसे कथित संत जो भारत की वास्तविक परिस्थितियों को समझे बगैर संतान उत्पत्ति और उसमें से एक को किसी कार्य विशेष के लिए दे देने की सलाह देते हैं तो उसे हल्के में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि ऐसे संतो के यहां तो देश का पूर्व चीफ जस्टिस भी कर नवा रहा है। नेताओं की तो बात ही अलग है। अब समझना उन महिलाओं को है जो इस पुरुष प्रधान पितृसत्तात्मक देश में अपने लिए भविष्य देख रहे हैं। वे याद रखें भाजपा की महिला सांसद और विधायकों की अपने खुद के बच्चों की संख्या कितनी है और उसके बाद समझे कि उन्हें पहले भीड़ तंत्र और फिर भेद तंत्र बनाया जा रहा है। यहां और एक बात और समझने लायक है। बच्चे पैदा होंगे और जिसके कहने पर होंगे वह मांग कर सकता है कि बच्चा विशेष चयन पद्धति से पैदा किया जाए। क्योंकि उन्हें तो एक विचार विशेष के लिए बच्चे चाहिए। छत्तीसगढ़ में सरकार का एक विभाग है जो सब राज्यों में है। पशुपालन विभाग इस विभाग के बाहर गायों के प्रजनन पर एक परियोजना विशेष चल रही है और इस परियोजना पर जो शोध हुआ था उसकी आलोचना भी होती थी पर सरकार नहीं रुकी। ईश्वर तुल्य पशु गाय के कृत्रिम गर्भाधान में गाय के मालिक को यह अधिकार है कि वह कृत्रिम प्रजनन में केवल बछिया ले बछड़ा नहीं। इसका यह अर्थ हुआ कि आपने गाय का विशेष अधिकार कि वह प्रकृति के नियम से चले और उसके बाद बछिया हो या बछड़ा पर मानव समाज इतना स्वार्थी है कि वह जिस पशु के शरीर में करोड़ देवी देवताओं का वास बताता है उससे भी छल करता है और अपने स्वार्थ के लिए केवल बछिया लेता है। तब साधारण मानव की क्या इज्जत करेगा।


