नेता प्रतिपक्ष का ढुलमुल रवैया छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की अपूर्णीय क्षति
बात समझनी है तो पूरी पढ़नी होगी
24hnbc.com
बिलासपुर, 4 अगस्त 2025।
वोट अधिकार यात्रा की तैयारी के संदर्भ में 5 सितंबर को बिलासपुर में कांग्रेस के नेता इकट्ठे हो रहे हैं। बताया जाता है कि बिहार में चल रही यात्रा समाप्त होने के बाद वोट चोर गद्दी छोड़ मामले को छत्तीसगढ़ में भी सिद्ध किया जाना है। इसी संदर्भ में यह बैठक होने वाली है इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत उपस्थित होंगे। रैली की संभावित तारीख 9 सितंबर को, प्रदेश प्रभारी पायलेट भी आएंगे। इसी बीच कांग्रेस मंत्री मंडल में कैबिनेट मंत्री रहे रविंद्र चौबे के एक बयान से प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। मामला सामूहिक नेतृत्व विरुद्ध भूपेश बघेल के बीच है। पूरे मामले में सवाल यह उठता है कि कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में किस तरह के नेतृत्व की जरूरत है और पदों पर बैठे वर्तमान नेता क्या उसे जरूर को पूरा कर रहे हैं तो हम पहला पद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज विधानसभा लोकसभा चुनाव में ना तो मेहनत किया ना ही मुद्दों को राजनीतिक मंचों पर और जनता के बीच प्रभावी तरीके से उठाया। चुनाव पश्चात भी उनके बदल जाने की खबर इतनी प्रभावी तरीके से उठाई जाती है कि यह बात लगती ही नहीं कि वह प्रदेश अध्यक्ष के पद पर अगले 24 घंटे भी रहेंगे, पर ये कांग्रेस है और दीपक बैज प्रदेश अध्यक्ष हैं। दूसरा महत्वपूर्ण पद जिसके पास एक बड़ा प्रोटोकॉल है और इस पद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है। नेता प्रतिपक्ष यह पद केवल विधानसभा सत्र के दौरान नहीं 24 घंटे सातों दिन सरकार के कामकाज पर नजर रखने वाला होता है। छत्तीसगढ़ में इस पद पर कांग्रेस के विधायकों ने चरणदास महंत को बैठाला है वे कांग्रेस सरकार के वक्त विधानसभा अध्यक्ष थे। दो वर्षों में कभी भी ऐसा नहीं लगा कि नेता प्रतिपक्ष प्रदेश सरकार के विरुद्ध कुछ कह रहा है कुछ कर रहा है। उल्टे बार-बार ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़ मंत्रीमंडल विस्तार के पूर्व महंत जी विष्णु साय मंत्रिमंडल के 12वें मंत्री हैं और अब इनका नंबर 15वें मंत्रिमंडल के रूप में आ रहा है।
प्रदेश में कर्मचारियों का आंदोलन हो, शिक्षा विभाग के घोटाले हो, बद से बत्तर कानून व्यवस्था की स्थिति है, ईसाई समाज, मुस्लिम समाज पर सरकार की बढ़ती हुई शक्ति हो किसी पर भी नेता प्रतिपक्ष ने ऐसा बयान नहीं दिया कि वह अखबार की हेडलाइन बन जाए। सब कुछ दोस्ताना तरीके से फ्रेंडली फुटबॉल मैच खेला गया यहां तक की एक से अधिक मौकों पर नेता प्रतिपक्ष ने अपने ही टीम पर गोल मारे। विधानसभा सत्र के दौरान भी, कांग्रेस रैली की तैयारी कर रही है। नेता प्रतिपक्ष की एक नुक्कड़ सभा ही रख ली जाए और परख लिया जाए कि उन्हें कौन सुनने आता है। चुनाव जीत लेने से कोई जन नेता नहीं बन जाता लगातार जीतने से उलटे यह सिद्ध होता है कि सब कुछ मिली जुली नूराकुश्ती है। इस नूराकुश्ती में अपनी सीट बचाने के चक्कर में क्या कुछ नहीं दे दिया जाता है। कभी हाई कमान को फुर्सत हो तो छत्तीसगढ़ की समीक्षा करके देख लें।
नक्सली संबंधों को लेकर अजीत जोगी पर बहुत कुछ टीका टिप्पणी की जाती है पर महंत जी की एक अदा ही बहुत कुछ बता देती है याद करें झीरम कांड के वक्त जब अजीत जोगी राज्यपाल शासन की मांग करते हुए राज भवन तक गए थे तब महंत जी कवासी लखमा के पलंग के किनारे क्या कहते हुए कैमरे पर पकड़े गए थे पर अजीत जोगी की बड़ी समाचार वैल्यू थे इसी कारण महंत जी की अदा मैनेज हो गई और शंका की सी बार-बार जोगी की और मोड़ दी जाती रही। महंत जी का ढुलमुल नेतृत्व कांग्रेस को अपूरणीय क्षति पहुंचा रहा है अंदाज रखें पूरे प्रदेश में भाजपा बे मतलब के मुद्दे प्रधानमंत्री की मां का अपशब्द को लेकर पत्रकार वार्ता, पुतला दहन कर रहा है पर नेता प्रतिपक्ष चुप है।


