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किस मठाधीश ने बिलासपुर संभाग में खोदी कांग्रेस की कब्र

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बिलासपुर, 31 अगस्त 2025। 
असली नकली आदिवासी नेतृत्व के बीच कांग्रेस में उन नेताओं की खोज की ही नहीं गई जिनकी राजनीतिक तिकड़मों के चलते बिलासपुर संभाग में कांग्रेस की मिट्टी पलीत हुई। पार्टी की मिट्टी पलीत करा के इन नेताओं ने अपनी विधानसभा क्षेत्र और संसदीय क्षेत्र को सुरक्षित रखा बदले में तीन गुना तक दिया। अविभाजित मध्य प्रदेश के वक्त सारागांव क्षेत्र के एक नेता जिनके पिता भी कांग्रेस में ही थे को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गृह विभाग दे दिया। इसके साथ आबकारी भी डायरेक्ट इनडायरेक्ट उन्हीं के पास चला गया। यहीं से शुरू होती है राजनीति और शराब ठेकेदारों की वह नापाक दोस्ती जिसमें कांग्रेस की जड़ नहीं कब्र खोद दी। महंत जी का सिख दारू ठेकेदार के साथ ऐसा याराना रहा की पंडा तो पंडा गुरुजी तक पंडा बने के लिए लालायित रहते थे।
आबकारी का गलत धंधा साथ में जमीन और चमड़ी का छौंक पार्टी शराब, कबाब और शबाब का गठजोड़ बन गई। इसी बीच कांग्रेस में उच्च स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन हो गया और हाई कमान को जोगी पसंद आ गया। पर अब तक तो बिलासपुर संभाग में महंत ने पार्टी की वाट लगा दी, योगी के साथ मात्र 3 साल का समय था। अर्थात 2 साल स्वागत सत्कार और उपचुनाव में समय कट गया। झूठी सच्ची कहानियों के दम पर सरकार बनाने में माहिर भाजपा ने बस्तर में खेल कर दिया। कांग्रेस की सत्ता चली गई एक से ज्यादा बार प्रदेश अध्यक्ष की कमान सीडीएम को मिली, पर अग्र बंधुओं की स्तुति इतनी ज्यादा हुई की बिलासपुर संभाग में कांग्रेस खरीदी नहीं बिक्री की दुकान नजर आने लगी। उसे समय भी त्रिफला की कहानी कही जाती थी मगर मेहनत अकेला व्हीलचेयर वाला नेता करता था और विरोधी व्हीलचेयर वाले नेता को ही डॉक्टर का एजेंट कहते थे। बिलासपुर संभाग की कई बार प्रशासनिक सर्जरी हुई है। जांजगीर जिले का एक ब्लॉक जो अब खुद जिला बन गया है को सट्टा की राजधानी का तमगा हासिल है। जानकार बताते हैं की सट्टे का पूरा कारोबार अग्र बंधुओं के हाथ में है और उसमें से अधिकतर अग्र बंधुओं को सीडीएम का वरदहस्त प्राप्त है। यहां तक की एक खाईवाल ने तो एक पत्रकार संगठन की का पदाधिकारी होना भी स्वीकार किया और अपने जन्मदिन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपने आका को ही बुलाया आका तो नहीं आए आकी आई पूरे प्रदेश में कांग्रेस सब संसदीय सीट हारती है पर सीडीएम या उनका पारिवारिक सदस्य जितता है ऐसा क्यों ....?