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लो हो गया मंत्रिमंडल विस्तार, बिलासपुर को नहीं मिला कोई उपहार
- By 24hnbc --
- Tuesday, 19 Aug, 2025
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बिलासपुर, 20 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पहले कार्यकाल में दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार हो ही गया। दूसरा इसीलिए की जब मुख्यमंत्री ने शपथ ली थी तो दो डिप्टी सीएम की शपथ ही हुई थी। तीन नये मंत्री खुशवंत साहेब, राजेश अग्रवाल और गजेंद्र यादव के रूप में तीन विधायक मंत्री बने और मंत्रिमंडल अब 14 का है, अर्थात पूरा एक भी स्थान खाली नहीं। इसी बीच कई बार ऐसी भी चर्चा रही की कार्य समीक्षा उपरांत खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों का विभाग बदला जा सकता है। कुछ को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है पर यह सब प्रयास नहीं गॉसिप सिद्ध हुआ। तीन विधायक को मंत्री बने उनका नाम 5 दिन से खबरों में पक्का हो रहा था कोई संदेश किसी को नहीं था।
अब बात बिलासपुर जिले की करते हैं बिलासपुर की उपेक्षा हो गई पहले यहां से सीएम हुआ करता था अजीत जोगी, फिर कैबिनेट मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष इसके पहले तो सीएम और विधानसभा अध्यक्ष दोनों बिलासपुर जिले से ही थे। मरवाही विधानसभा से सीएम और कोटा विधानसभा से अध्यक्ष खैर पुराने मेकअप को याद करके आज जिले की राजनीति उपेक्षा पर आंसू बहाना गलत है, क्योंकि मतदाता को परिपक्व माना जाता है और उसने अपने विधायक के रूप में जिन्हें चुना वे मंत्री पद के लायक है इस पर मुख्यमंत्री के निर्णय को कोई चुनौती तो नहीं दे सकता, प्रश्न उठता है कि यदि प्रथम बार विधायक बना व्यक्ति मंत्री बन सकता है तो वह बिलासपुर जिले से क्यों नहीं हो सकता....
बेलतरा से तो प्रथम बार टिकट पाई और जीत भी गए तो यह योग्यता छोटी तो नहीं है और फिर बेलतरा विधायक का विधानसभा सत्र में प्रदर्शन भी अच्छा रहता है। अपनी ही सरकार को कई बार आईना दिखाते हैं। एशिया का सबसे बड़ा ब्लॉक का खिताब रखने वाला बिल्हा और उसके विधायक समर्थक तो बिल्हा से छत्तीसगढ़ का सीएम बनेगा का दावा करते थे। ओबीसी की राजनीति के धूरी है। महोदय पीएम कार्यालय तक नाम की चर्चा है जब कभी भी बिलासपुर जिले में मोदी जी की सभा होती है तो बिल्हा विधानसभा का नाम लिया जाता है। फिर क्या कारण की सीधे विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ के क्या बिल्हा विधायक को मंत्री के लायक नहीं मानते जो पूरी विधानसभा का संचालन करता हो क्या वह एक मंत्रालय के लायक भी नहीं है। यही सीएम कांग्रेस कार्यकाल में इतनी मनमानी करते तो पार्टी में प्रतिस्पर्धा खेमा मोर्चा खोल देता पर यहां तो वोट चोरी से बनी सरकार के विधायक अंदर से डरते हैं की जिसने जिताया है वह जनता नहीं और रिंग मास्टर जो दिल्ली में बैठा है उसकी नजर टेढ़ी हो गई तो गायब होने में टाइम नहीं लगता उदाहरण धनकर का है। अर्स से फर्श और फर्श से लापता इसीलिए उपेक्षित धुरंधर अग्रवाल भी लामबंद नहीं हो पाते और विधानसभा सत्रों में सब की बोलती बंद करने वाले अजय सामान्य राजनीति में चुप हो जाते हैं। अब किस कब कोई मौका मिलेगा लगता नहीं आगामी विधानसभा चुनाव के पहले मंत्रिमंडल फेरबदल केवल समाचार पत्रों का विषय होगा।


