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अब काहे का तिहार, फिर टला मंत्रिमंडल विस्तार

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बिलासपुर, 11 अप्रैल 2025।
छत्तीसगढ़ में निगम मंडलों में नियुक्ति के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ही 10 अप्रैल तक हो जाएगा छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का विस्तार कह कर अखबारों को कुछ दिन के लिए खबर लिखने के लिए सामग्री दे दी थी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी भी आए तब मंत्रिमंडल विस्तार को और बल मिल गया तभी 10 तारीख को यह खबर मिल गई कि मंत्रिमंडल संभावित विस्तार टल गया है। असल में भाजपा के बड़े नेताओं के बीच ही प्रदेश के भीतर गुटबाजी है।
मंत्री पद के दावेदार पुराने खुर्राट नेता खुर्राट के बीच में से काम खुर्राट ढुंढना सीएम साहब की मजबूरी है। बड़ी मुश्किल से बृजमोहन से जान बचाई अब किसी पुराने को फिर से मंत्रिमंडल में जगह देकर वे स्वयं के लिए खतरा नहीं मोल लेना चाहते। खबर लिखने वालों ने तो डिप्टी सीएम का पद भी विलोपित बता दिया। दावेदारों का नाम रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग के बीच झूलने लगा। नेता के समर्थक नेता से ज्यादा दावे करते देखे गए। बिलासपुर में तो दो पुराने नेताओं की बाड़ी लेंग्वेज पर भी नजर रखी गई जिस दिन भाजपा कार्यालय में वक्फ विधेयक वाली पत्रकार वार्ता डिप्टी सीएम साव ने ली तो पत्रकार बिलासपुर विधायक और बिल्हा विधायक के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे। शायद किसी के आंख में तो मंत्री बनने की चमक दिख जाए। जब 10 तारीख को यह पता चला की मंत्रिमंडल विस्तार टल गया तो यह भी निश्चित हो गया कि छत्तीसगढ़ के सीएम अपने इस निर्णय के लिए कहीं दूर की हरी झंड़ी का इशारा नहीं पा पाए। 
राजनीति और व्यापार के जानकार कहते हैं सब कुछ गुजरातियों के हाथ में है। एक समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को लख्खी की गाय कहां जाता था अब तो सब गुजरातियों के हवाले है और छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया केवल मन को बहलाने वाला है।