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बिलासपुर महापौर ओबीसी, सबसे पहले भाजपा के ओम प्रकाश ने की दावेदारी

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बिलासपुर, साथ जनवरी 2024।

स्थानीय निकाय आरक्षण की लॉटरी निकलते ही बिलासपुर में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी दावेदार टिकट के लिए सक्रिय हो गए। भाजपा से पूर्व पार्षद नगर पालिका निगम में मुख्य सचेतक रह चुके ओमप्रकाश देवांगन ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला और बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल से मिलकर अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। 

इसी तरह कांग्रेस में भी दावेदारी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ओबीसी राजनीति को जिस तरह से आगे बढ़ाया था उसके चलते कांग्रेस में ओबीसी नेताओं की कमी तो नहीं है पर सत्ता में नहीं होना दावेदारों को टिकट का दावा करने के पहले वित्तीय प्रबंधन सोने के लिए बाध्य करता है। कारण पूर्व की अपेक्षा नगर पालिका निगम की सीमा बहुत बड़ी है और प्रत्यक्ष निर्वाचन में खर्च विधानसभा चुनाव से कहीं ज्यादा लगने वाला है। 

भाजपा पार्टी के चुनाव प्रत्याशी चयन में उपमुख्यमंत्री अरुण साल जो नगरी निकाय मंत्रालय ही देखते हैं की भूमिका और सांसद तोखन साहू जो केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और नगरी निकाय ही देखते हैं दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है। इसके अतिरिक्त बिलासपुर विधायक और बेलतरा विधायक दोनों का मत भी महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में बिलासपुर महापौर प्रत्याशी के लिए खेमेबाजी से इनकार नहीं किया जा सकता। 

जब अंतिम प्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर का चुनाव हुआ था और दो ओबीसी प्रत्याशी भाजपा से किशोर राय और कांग्रेस से रामशरण यादव के बीच मुकाबला हुआ था तब भाजपा प्रत्याशी किशोर राय ने अमर अग्रवाल की जीत का रिकॉर्ड तोड़ते हुए कांग्रेस प्रत्याशी रामशरण यादव को पछाड़ा था।वैसे भाजपा में ओबीसी महिला नेत्रों की भी कमी नहीं है ऐसे में दावेदारों की सूची लंबी हो सकती है, और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता भी टिकट के लिए सक्रियता दिखा सकते हैं। 

उप मुख्यमंत्री ओबीसी सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री ओबीसी के बाद अब महापौर भी ओबीसी से सवर्ण वर्ग में नाराजगी की खबर भी है। कल अर्थात 8 तारीख को होने वाला त्रिस्तरीय पंचायत आरक्षण में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद यदि सामान्य कोटे में नहीं गया तो यह नाराजगी बढ़ सकती

है।