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भूपेश की गिरती साख, एससी वोट बैंक का हो रहा कबाड़ा

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बिलासपुर, 9 जुलाई 2024। 
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री का प्रभाव जिस तेजी से प्रदेश में नीचे गिरा वैसा दो पूर्व मुख्यमंत्री जोगी और रमन के साथ कभी नहीं हुआ। सम्मानजनक विधायक संख्या के बावजूद छत्तीसगढ़ में एल ओ पी चरण दास महंत जानबूझकर प्रभावहीन है। यदि यही हाल रहा तो एससी का वोट बैंक कांग्रेस के हाथ से स्थाई रूप से निकल जाएगा। सत्ता में रहने के 5 साल कांग्रेस अपने मुख्यमंत्री के कहने पर जिस तरह ओबीसी राजनीति के फेर में पड़ी उससे एससी वोट बैंक दरक गया। नीला कपड़ा कंधे पर डालकर जिस अग्रेशन के साथ एक आर्मी वाले राजनीति कर रहे हैं उनका मुकाबला कांग्रेस के सुस्त एससी नेताओं से नहीं बनेगा। 
5 साल सत्ता में रहते हुए कांग्रेस के एससी कोटे के मंत्रियों ने अपने वर्ग का युवा वोट बैंक जोड़ना तो दूर खो दिया। वे यह समझना ही नहीं चाहते कि उनका मुकाबला साइकिल वाले काशीराम से नहीं मूंछों पर ताव देकर महंगी एक्सयूवी में चढ़ने वाले आर्मी टाइप लोगों से है। इस चक्कर में कांग्रेस ने अपने एससी प्रकोष्ठ का भी बंटाधार कर लिया। 
बलौदाबाजार कांड के कुछ शुरू में और 7 तारीख की विवादास्पद घटना के बाद यदि जिग्नेश मेवाड़ी जैसे ऊर्जावान विधायक का दौरा कराया होता तो भीम आर्मी के नेता को प्रवेश का द्वारा ही नहीं मिलने पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एल ओ पी पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष तीनों की संयुक्त गलती का परिणाम कांग्रेस को भोगना पड़ेगा। इन नुकसान का आकलन के लिए बहुत दिन इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। स्थानीय निकाय के चुनाव में इस नुकसान का पता चल जाएगा। ऐसा नहीं की पार्टी के पास एससी वर्ग के युवा चेहरे नहीं है। पर यह वो चेहरे हैं जो खुशबूदार लकड़ी की चौखट पर नकद अर्पण कर पद्य नहीं ले सकते और लकड़ी पर अर्पण के बगैर कहा जाता है कि पार्टी में पत्ता भी नहीं हिलता।