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अगवा का भगवा भाजपा की सोच ही लोकतंत्र विरोधी है

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बिलासपुर, 26 अप्रैल 2024। 
गुजरात प्रदेश के सूरत लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को वहां के जिला निर्वाचन अधिकारी ने तमाम लोकतांत्रिक परंपरा को दरकिनार कर निर्विरोध जीत का प्रमाण पत्र दे दिया। जिला निर्वाचन अधिकारी ने तीन तरह से गड़बड़ी की पहले जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन स्वयं किया जिसकी रक्षा उन्हें करनी है। लोकतंत्र की परिभाषा जनता द्वारा जनता के लिए जनता पर शासन को नकारा, तीसरा मताधिकार जो मौलिक अधिकार के समान है जिससे लाखों लोगों को वंचित किया। यह सजा उन्होंने जानबूझकर मतदाताओं पर आरोपित कर दिया। इस पूरे प्रकरण में एक बात जो विशेष रूप से समझी जानी चाहिए जैसे ही किसी विधानसभा अथवा लोकसभा क्षेत्र में नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ होती है वैसे ही ईवीएम मशीन पर एक नामांकन पत्र स्वत: अपलोड हो जाता है। जिसकी कभी ना तो जांच की जा सकती है ना ही उसे रद्द किया जा सकता है इसका नाम है " नोटा" सूरत में भी जब एक प्रत्याशी को छोड़ शेष के नामांकन रद्द हो गए या वापस ले लिए गए तब दो प्रत्याशी बचे पहले भारतीय जनता पार्टी का दूसरा नोटा निर्वाचन अधिकारी को यह अधिकार ही नहीं की वह किसी को निर्विरोध निर्वाचित कर दे। ईवीएम पर दो प्रत्याशी पहले भाजपा और दूसरा नोटा के साथ तो तिथि को मतदान कराया जाना चाहिए था ऐसा ना करके जिला निर्वाचन अधिकारी ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को दूषित कर दिया है। चुनाव न करा कर चुनाव जीतना भाजपा की वन नेशन, नो इलेक्शन वाली सोच है। तभी तो त्रिस्तरीय पंचायत में गुजरात ऐसा पहला प्रदेश था जहां ग्राम पंचायत में निर्विरोध चुनाव होने वाली पंचायतों को विशेष फंड दिया जाता था। बाद में यही सोच मध्य प्रदेश भाजपा सरकार ने पकड़ी, लोकतंत्र में चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है चुनाव न करने के तमाम प्रयास आत्मा के हत्या के हथकंडे हैं। जिसमें भाजपा लगातार अनोखा प्रयोग करती है। 
चंडीगढ़ मेयर चुनाव, सूरत लोकसभा चुनाव, खजुराहो मध्य प्रदेश के, छत्तीसगढ़ के एक बाई इलेक्शन अंतगढ़ को भी जोड़ लें। ये सब भाजपा के लोकतंत्र विरोधी चेहरे को दिखने वाले उदाहरण हैं। इसी तरह बिलासपुर लोकसभा नाम निर्देशन पत्रों की जांच के दौरान भी एक नामांकन पत्र की जांच तो उसे रद्द करने का जो कारण बताया गया उससे यह संदेह पैदा हो गया कि बिलासपुर लोकसभा मतदाता सूची दूषित है। अभ्यर्थी बनने के लिए दिलीप अग्रवाल नाम के मतदाता ने नामांकन पत्र दाखिल किया था उनके कल 10 प्रस्तावक थे प्रस्तावकों की मतदाता पर्ची को सहायक रिटर्निग अधिकारी ने सत्यापित किया था सरल अनुक्रमांक और अनुभाग फार्म पर वैसा ही दर्ज किया गया था जैसा मतदाता पर्ची में लिखा मिला, पर निर्वाचन अधिकारी ने यह कारण बताते हुए नाम निर्देशन पत्र खारिज किया कि मेरे पास उपलब्ध मतदाता सूची से प्रस्तावकों का अनुक्रमांक मेल नहीं खाता इससे यही जाहिर हुआ कि नामांकन पत्र भरने वाले व्यक्ति के प्रस्तावकों के पास जो मतदाता सूची का जो प्रमाणित प्रतिलिपि है जिसे सहायक निर्वाचन अधिकारी ने सत्यापित किया है वह और निर्वाचन अधिकारी के पास उपलब्ध मतदाता सूची में भिन्नता है। यह मतदाता सूची को दूषित करने के लिए पर्याप्त है और इसी दूषित मतदाता सूची पर मतदान होगा सैकड़ो मतदाता को उनके मतदान से वंचित किया जाएगा।
4 जून के मतगणना पश्चात यदि भाजपा निर्वाचित होकर सरकार बनती है तो उसी दिन लोकतंत्र की हत्या तय है। संविधान को बीआर अंबेडकर भी नहीं बदल सकते ऐसा इन दिनों आम सभाओं में मोदी जी कह रहे हैं नो इलेक्शन नो पॉलीटिकल पार्टी का फार्मूला लागू करने के बाद संविधान के स्थान पर उनका प्रमुख ग्रंथ मनुस्मृति आप्त वचन लागू हो जाएगा।