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छत्तीसगढ़ की आयु 23 साल, 15 साल रहा भाजपा का राज "नक्सलवाद पर क्यों नहीं करते खुली चर्चा"

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बिलासपुर , 25 अप्रैल 2024।
लोकसभा चुनाव के दूसरे दौर का मतदान 26 तारीख दिन शुक्रवार को होने वाला है। पहले दौर का मतदान भी शुक्रवार को ही हुआ क्या यह केवल सहयोग है। छत्तीसगढ़ की तीन लोकसभा सीट पर भी मतदान कर के, लिहाजा पिछले तीन दिन से भाजपा के तीन स्टार प्रचारक पहला प्रधानमंत्री, दूसरा गृहमंत्री व तीसरा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लगातार छत्तीसगढ़ में वोटो के ध्रुवीकरण, मंदिर, नक्सलवाद और छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। अभी चार माह पूर्व ही इस राज्य में कांग्रेस हारी है। भारतीय जनता पार्टी ने तब लंबे वादे करके सत्ता पाई पर उन वादों का जुमलीकरण दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खत्मा हो जाए सब चाहते हैं पर इस मामले में कांग्रेस से ज्यादा गंदी नियत भाजपा की नजर आती है। 
छत्तीसगढ़ गठन के बाद से कांग्रेस के 8 साल, भाजपा के 15 साल यदि किसी की भी इच्छा शक्ति होती तो नक्सलवाद खत्म हो जाता। भाजपा के दामन पर सबसे बड़ा दाग सलवा जुडूम है जब उच्चतम न्यायालय ने इसे सरकार साथिर्त हिंसा कहते हुए ना केवल आदिवासी वर्ग के एक समूह को शस्त्र देकर नक्सलियों के खिलाफ उपयोग को अवैधानिक कहा था, साथ ही सभी एसपीओ से हथियार वापस कराए थे। उसे समय बस्तर में छत्तीसगढ़ पुलिस के कुछ अधिकारियों का ऐसा आतंक था की सीबीआई और विशेष जांच बाल भी बैरंग वापस कर दिए जाते थे। बस्तर सहित शहरी लोग भी वो
 दौर नहीं भूल सकते जनसुरक्षा कानून के आड़ में पत्रकारों के खिलाफ जिस तरह मामले दर्ज हुए वह भी याद है। ऐसे में राज्य से कांग्रेस का सफाया या नक्सलवाद का सफाया का वास्तविक अर्थ जानना कोई बड़ी बात नहीं। 
देश में भाजपा के 10 सालों में आरपीएजी की रिपोर्ट बताती है कि पत्रकारिता पर दमन के लिए यह स्वर्णिम काल है। 2020 में ही कुल 13 पत्रकार समाचारों के कारण मारे गए। उत्तर प्रदेश में 6, असम, मध्य प्रदेश में 2-2, 101 पत्रकारों पर शारीरिक और ऑनलाइन हमले हुए 42 पत्रकारों को पुलिस ने या दूसरे राजनीतिक दल के समर्थकों ने पिटा, तीन पत्रकारों को सेना के जवानों ने पिटा। 2020 में कुल 37 पत्रकार हिरासत में लिए गए। 2021 में पांच पत्रकारों की हत्या उनके काम के वजह से हुई। अविनाश झा बी एन एन बिहार, चिन्ना केशबालू ई वी एस आंध्र प्रदेश, मनीष कुमार सुदर्शन न्यूज़ बिहार, रमन कश्यप साधना प्लस उत्तर प्रदेश, सुलभ श्रीवास्तव एवीपी गंगा उत्तर प्रदेश ऐसे में पिछले 10 साल पत्रकारिता पर जोर जबरदस्ती के रूप में पहचाना जाएगा यह बात अलग है कि दरबार मीडिया का मजा रहा। 
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के सफाई करने वाले यह भी बताएं कि उन्हीं के शासनकाल में विधानसभा में बंद दरवाजे के भीतर विशेष बहस करने वाले और उस बहस के बाद छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर क्या हुआ। कोई भी इस विशेष बंद दरवाजे वाली बैठक के बहस और चर्चा को आम करने की बात क्यों नहीं कहता.....