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कोरबा लोकसभा चुनाव टाइमिंग पर ध्यान दें, बहुत कुछ हो रहा है राज्य की राजनीति में

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बिलासपुर, 20 अप्रैल 2024। 
देश भर में जिन भी राज्यों में छत्रपों की कोई राजनीतिक हैसियत रही ऐसे नेता देश की सबसे पुरानी राजनीतिक दल कांग्रेस से ही निकले। छत्तीसगढ़ में ऐसे ही एक नेता अजीत जोगी थे। कांग्रेस ने उन्हें राज्य बनने के बाद प्रदेश की कमान सौंप थी। 2003 में कांग्रेस चुनाव हार गई तीन बार कांग्रेस हाई कमान ने अजीत जोगी को भरपूर मौका दिया की प्रदेश में वे कांग्रेस को सत्ता में वापस लाएं। पर ऐसा नहीं हो सका राजनीति के जानकार तो यह भी दावा करते हैं कि अजीत जोगी भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री रमन सिंह से मिलकर राजनीति करते थे। भाजपा सत्ता में आई थी और बदले में जोगी के काम होते रहते थे। पढ़ने वाले को लगेगा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हम अजीत जोगी और रमन सिंह की कहानी क्यों याद कर रहे हैं। असल में जोगी रमन की या रमन जोगी की राजनीति को आज याद करना बेहद जरूरी है। छत्तीसगढ़ के 2018 के चुनाव के विधानसभा चुनाव के पूर्व ही अजीत जोगी को यह समझ आ गया था कि राहुल गांधी के सामने उनकी नहीं चलेगी और इसी कारण उन्होंने अपना एक अलग राजनीतिक दल जेसीसीजे 16 जून 2016 को मरवाही जहां से वह चुनाव लड़ते थे गठन का ऐलान कर दिया। 2018 के चुनाव के बाद योगी जी का निधन हो गया आज 20 अप्रैल है मरवाही में ही जेसीसीजे की पूरी जिला इकाई भाजपा में मर्ज हो गई। जोगी जी के पुत्र अमित जोगी पिछले दो साल से राजनीति की जिस डगर से चल रहे हैं उसे समझने के लिए एक कहावत याद आती है। मेरी दो आंख फूट जाए पर सामने वाले की एक फूटनी चाहिए। राजनीतिक गलियारों में समय-समय पर यह चर्चा होती रहती है कि अमित जोगी का देश के गृहमंत्री अमित शाह से खासा लगाव है। छत्तीसगढ़ के 2023 के विधानसभा चुनाव में अमित जोगी ने अपने लिए कोई सुरक्षित सीट नहीं ढूंढा उलट भूपेश बघेल की पाटन सीट पर चुनाव लड़ने गए बताया जाता है पैसा भी खास खर्च किया। कहां से आया होगा....? 2018 के चुनाव में जेसीसीजे को 8 सीट मिली थी अमित जोगी ने अपने पिता की लकीर को पूरी तरह मिटा दिया। पार्टी जीरो पर आ गई। यहां तक की जीत की हैट्रिक लगाने वाली उनकी माता जी भी कोटा से चुनाव हार गई। आज जेसीसीजे के मर्जन कार्यक्रम में अमित जोगी नहीं थे पर उनकी हरी झंडी रही होगी। यहां यह जानना बेहद जरूरी है कि मरवाही कोरबा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और मरवाही में अभी भी जोगी परिवार की पकड़ है। अजीत जोगी के निधन के बाद यहां उपचुनाव हुआ था और कहा जाता है कि अमित जोगी का जाति प्रमाण पत्र रातों-रात रद्द कर कर उसके नामांकन पत्र को रद्द कर दिया था तब से अमित जोगी हर तरह से भूपेश बघेल को नुकसान पहुंचाते हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में जेसीसीजे के प्रत्याशी को 39882 बोट मिला कांग्रेस के प्रत्याशी को 39221 और जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी को 51960 अब लोकसभा कोरबा में अमित शाह की प्रतिष्ठा दाव पर है। यहां से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत जो अभी छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष हैं की पत्नी ज्योत्सना महंत जो पूर्व में सांसद थी को दोबारा टिकट मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने सरोज पांडे को प्रत्याशी बनाया इतना ही नहीं अप्रैल महीना अमित जोगी के लिए विशेष रहा इसी महीने में छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड पर हाई कोर्ट का निर्णय आया और उच्च न्यायालय ने सत्र न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा सत्र न्यायालय के निर्णय में अमित जोगी को छोड़ से सभी आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया था। अब मरवाही, पेंड्रा इकाई खुलकर आज से भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडे जिनकी जीत के लिए अमित शाह तक चिंतित हैं खुलकर काम करेगी। 
19 तारीख को ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में राज्य की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के सचिन रहे अमन सिंह जो वर्तमान में अदानी की कंपनी में बड़े पद पर हैं की विरुद्ध क्लोजर रिपोर्ट डाल दी। इसके पूर्व छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में ही एक बार ईओडब्ल्यू की एफआईआर को रद्द कर दिया था। जिस पर देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगन दिया था पर अब उस स्थगन का कोई अर्थ नहीं रह जाता क्योंकि ईओडब्ल्यू ने क्लोजर रिपोर्ट डाल दी साइनिंग अपने आप में बहुत कुछ कहती है। लोकसभा चुनाव का पहला फेज हो गया है पश्चिम बंगाल को छोड़ सब जगह पिछले लोकसभा के मुकाबले मतदान काम हुआ है। विशेषज्ञ कह रहे हैं आर एस एस के स्वयंसेवक भी मतदाताओं को बूथ तक नहीं ला रहे। ऐसे में आदिवासी क्षेत्र जहां वनवासी आश्रमों का बड़ा महत्व है क्या संघ की चल चलेंगे। यदि ऐसा हुआ तो वनवासी आश्रमों की उदासीनता की पूर्ति अमित जोगी करेंगे।