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कांग्रेस का ओबीसी प्रेम उसे पड़ेगा महंगा
- By 24hnbc --
- Tuesday, 26 Mar, 2024
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बिलासपुर, 26 मार्च 2024।
लोकसभा चुनाव की घोषणा के पहले भी और अब भी कांग्रेस पार्टी अब तक मुद्दों पर बात नहीं कर रही है जबकि आर्थिक मुद्दे ही यदि देखे जाए तो 11 बिंदु ऐसे हैं जिन पर भाजपा की बोलती बंद है। जिन्हें एमएसएमई की डूबा जहाज, मनरेगा में बढे मजदूरों की संख्या, कुछ कॉरपोरेट बिलेनियर, हजारों कंपनियां दिवालिया की लाइन में, सस्ता कच्चा तेल, महंगा पेट्रोल डीजल, जीएसटी की लूट, संगठित क्षेत्र का कॉरपोरेशन, कौड़ी के माल बेचे पीएसयू, बढ़ता विदेशी कर्जा जीडीपी के बराबर, असंगठित क्षेत्र का कोई सर्वे नहीं, महंगाई, बेरोजगारी, देश की 55% संपत्ति 10% के पास और जनगणना से भागती सरकार इतने सबके बावजूद कांग्रेस बिलासपुर के प्रत्याशी चयन में अपनी मानसा उसे जातिगत जनगणना पर टिकाए हुए हैं जिसके आधार पर विधानसभा चुनाव में टिकट बाट कर हार का स्वाद उसे मिल चुका है। कांग्रेस पार्टी की एआईसीसी में बैठा नेता कब समझेंगे कि बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र की जनता एक प्रबुद्ध और ऐसे प्रत्याशी चाहती है जो दिल्ली में देश की सबसे बड़ी पंचायत में उसे बिलासपुर को रेपरजेंट करे जहां पर एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी के साथ तीन से अधिक विश्वविद्यालय, मिनी रत्न कॉल कंपनी का हेड क्वार्टर, मोस्ट मॉडल विद्युत संयंत्र एनटीपीसी, सबसे कमाओ रेलवे जोन और उसका सबसे कमाओ मंडल और भी ऐसा बहुत कुछ है जिसके लिए आवाज उठाने की जरूरत है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बंपर बहुमत मिला पर बिलासपुर जिले में कांग्रेस कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी जबकि उसे समय बिलासपुर क्षेत्र की कमान कांग्रेस के चंदन यादव के पास थी। ठीक बाद लोकसभा चुनाव हुए कांग्रेस ने मुंह की खाई तब भी चंदन यादव तो यही था विधानसभा चुनाव में हारे भी चंदन यही थे प्रदेश प्रभारी बदल दिए गए एक नहीं दो बार पर चंदन यही है। इस लोक सभा चुनाव में भी जो संभावित नाम बार-बार सुनने में आ रहे हैं वह एक ही वर्ग से क्यों है कहीं इसके पीछे भी चंदन ही तो नहीं है। ऐसा सुनने में आ रहा है कि पंचवटी कांड के चक्कर में टिकट बदल दिया गया है पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बिलासपुर की राजनीति के बारे में और अधिक ग्राउंड वर्क करना चाहिए और सही निर्णय पर पहुंचने से ही बिलासपुर संसदीय सीट कांग्रेस की झोली में गिर सकती है।


