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मूर्ति चोरों का चुनाव से क्या संबंध
- By 24hnbc --
- Tuesday, 26 Mar, 2024
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बिलासपुर, 26 मार्च 2024।
बिलासपुर जिले का मस्तूरी ब्लॉक ऐतिहासिक धरोहर को रखने वाला क्षेत्र है। इसी के साथ ऐतिहासिक धरोहर की चोरी करने वालों के लिए भी यह क्षेत्र पसंदीदा क्षेत्र है। यहां पर दो स्थान मल्हार और इटावापाली की मूर्तियां लगातार मूर्ति चोरों के लिए सॉफ्ट टारगेट रहती है। मल्हार की डिंडेश्वरी और इटावापाली की भंवर गणेश दोनों मूर्तियां काले रंग की है। मूर्ति चोरों के संगठित गिरोहों को कभी भी पुलिस ने मुखिया तक हाथ नहीं रखें शायद इसके पीछे बड़ा राजनीतिक संरक्षण एक कारण है। आश्चर्य की बात यह भी है कि मूर्ति चोरों को चुनाव पूर्व ही मूर्ति की चोरी मुसीद लगती है। भंवर गणेश की मूर्ति की इस बार की चोरी लोकसभा चुनाव के ठीक पहले हुई है। इसी तरह 90-91 में मल्हार में डिंडेश्वरी की मूर्ति चोरी हुई थी और उसे समय के बैरियर पर आने-जाने के हर गाड़ी की एक रसीद करती थी तब महाराष्ट्र का एक ट्रक, उत्तर प्रदेश मैनपुर की मारुति वैन संदेह के दायरे में आई मैनपुर वाला किस्सा सही निकला ड्राइवर तो पकड़ा गया पर बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के यादव नाम का एक वकील पुलिस के पकड़ के बाहर रहा। इटावापाली भंवर गणेश की मूर्ति में भी जो पिछली चोरी हुई थी उसके सभी आरोपी नहीं पकड़े गए थे। 2002 एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि जो अभी भी छत्तीसगढ़ की राजनीति में सक्रिय है का नाम मूर्ति चोर गिरोह से जोड़ा गया था। कहां जाता है कि एक बड़े नेता के हस्तक्षेप के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। चुनाव का समय अपराध करने वालों के लिए इस कारण फेवर करता है कि पुलिस रूटीन चेकिंग के साथ चुनावी काम में व्यस्त रहती है और उसकी सूचना तंत्र केवल और केवल चुनाव पर ही केंद्रित होता है।


