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पहले समाज में घोला जहर जिसने इस जहर के खिलाफ बोले उसे कर रहे हैं क्वॉरेंटाइन
- By 24hnbc --
- Sunday, 24 Mar, 2024
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बिलासपुर, 26 मार्च 2024।
देश का परिधान मंत्री अपने परिवार को बचाने के लिए दो काम लगातार कर रहा है एक देश के लोकतंत्र में जहर घोलना और जो भी व्यक्ति इस जहर के खिलाफ बोले उसे उठाकर क्वॉरेंटाइन (जेल) की यह अवधि कम भी हो सकती है और अनिश्चितकाल की भी हो सकती है। क्वॉरेंटाइन करने वाली एजेंसी ईडी, सीबीआई, आईटी और कहीं कहीं तो देसी पुलिस भी हो सकती है। किसी एजेंसी का उपयोग करना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्वॉरेंटाइन किस करना है। संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, हेमंत सोरेन, अरविंद केजरीवाल यह सब उदाहरण है। क्वॉरेंटाइन के यह वह सूची है जो बिना पेंदी का लोटा नहीं बनी जो बिन पेंदी के लोटे हैं उसमें कई नाम है पर एक ही नाम बताना पर्याप्त है अजीत पवार बिन पेंदी के लोटों को दो नाम माया और ममता भी है। माया की माया माया जाने ममता का भी एक परिवार है ये वह परिवार है जो मुखिया को मजबूत नहीं बनाते कमजोर बनाते हैं।
भारत कभी भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी नहीं रहा हमारा मूल स्वभाव लोकतंत्र नहीं है पर लोकतंत्र की इतनी निचली श्रेणी इंदिरा गांधी के वक्त भी नहीं थी जैसे कि चुनाव की घोषणा हुई थी जेल में बंद हर राजनीतिक व्यक्ति को बाहर किया गया था पर यह 2024 का आचार संहिता लगने के पहले भी और बाद भी परिधान मंत्री के परिवार को रोशनी दिखाने वाला हर व्यक्ति क्वॉरेंटाइन कर दिया जाएगा। जब ईडी की पूछताछ के लिए राहुल गांधी को बुलावा भेजा गया पूछताछ के बाद वे सड़क पर बैठे हमारे देश के परंपरा के विपरीत उन्हें सड़क पर बैठते ही ज्ञान की अनुभूति हो गई। किसी पेड़ के नीचे बैठने की जरूरत नहीं पड़ी जिन्हें पेड़ के नीचे बैठकर ज्ञान मिलता है वह जंगल की ओर चल देते हैं। सड़क पर बैठकर ज्ञान मिला तभी राहुल गांधी ने देश की ही नहीं विदेश की भी सड़के नाप दी यह सिलसिला 1 - 2 -10 -100 -200- 1000- 2000 नहीं अनवरत चल रहा है। और इसीलिए जो चला जाता है उसे क्वॉरेंटाइन करने की हिम्मत नहीं होती।
लोकसभा चुनाव की इस बेला पर किसी को किसी से शुभकामनाएं नहीं चाहिए जिन्हें देश से प्रेम है उन्हें तो परिधान मंत्री से मुक्ति चाहिए और यह मुक्ति मंत्र लागू कैसे होगा इसी का मनन करना है और मार्च के अंतिम सप्ताह अप्रैल के प्रथम सप्ताह में लगने वाले ग्रहण के बीच मुक्ति का मार्ग ढूंढना है।


