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बिलासपुर के संदर्भ में,

ओबीसी प्रेम के नुकसान को जितना जल्दी कांग्रेस समझे उसे लाभ होगा

24hnbc.com
बिलासपुर, 23 जनवरी 2024।
छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी बदलने के बाद प्रदेश सचिव भी बदल दिए गए चंदन यादव की विदाई हो चुकी, उन पर तो 2018 के चुनाव से ही मालपानी समेटने के आरोप लगाते रहे पर 2018 में कांग्रेस को जीत मिली थी तो इन आरोपों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब कांग्रेस के हार के बाद इन्हें हटाया गया है। माना जा रहा है कि इसी महीने बिलासपुर कांग्रेस संगठन को नया ग्रामीण अध्यक्ष मिल जाएगा। जिन तीन नाम की चर्चा चल रही है उसमें दो ओबीसी और एक सर्वण वर्ग से है। 
यह समझ ही नहीं आता कि कांग्रेस के कर्ताधर्ता अभी भी ओबीसी फेरे में क्यों पड़े हैं। 5 साल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ओबीसी प्रेम हर का प्रमुख के कारण बना। बिलासपुर जिले के भीतर कांग्रेस के जितने भी ब्लॉक अध्यक्ष रहे ओबीसी अध्यक्षों के क्षेत्र में कांग्रेस विधानसभा प्रत्याशी हरि है। बिल्हा में प्रत्याशी ओबीसी था ब्लॉक अध्यक्ष उन्हीं की बहू ब्लॉक अध्यक्ष थी परिणाम हार, तखतपुर ब्लॉक अध्यक्ष ओबीसी परिणाम हार, बेलतरा ब्लॉक अध्यक्ष ओबीसी परिणाम हार और भी उदाहरण है परिणाम हार ही रहा। ऐसे में फिर से ओबीसी फार्मूले पर चलकर कांग्रेस को क्या हासिल होने वाला है। हार को ही अपनी नियत बना लिया है उसी के अनुरूप नीति बना रहे हैं। क्योंकि हार उन्हें अच्छी लगती है। जिले का एक विधानसभा क्षेत्र मस्तूरी एससी आरक्षित था मस्तूरी का ब्लॉक अध्यक्ष सवर्ण था और यही से कांग्रेस को जीत नसीब हुई। उसे समय के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जब ब्लॉक स्तर से संगठन पदाधिकारी को बुलाकर समीक्षा की थी तब भी उनका रटा रटाया प्रश्न रहता था कितने ओबीसी को संगठन में जगह दी है। मस्तूरी समीक्षा के दौरान भी यही प्रश्न किया गया था मस्तूरी ब्लॉक के अध्यक्ष ने अपने क्षेत्र में सब को साथ लेकर चलने की नीति बनाई थी। तमाम दखल के बाद भी इस पर कायम रहे परिणाम मस्तूरी विधानसभा जहां पर 2018 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया तीसरे स्थान पर पहुंच गए थे इस बार संगठन की मदद से पहले स्थान पर आ गए और जिले की सर्वाधिक वोट से यह सीट जीती ऐसे में कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता अपने प्रदेश प्रभारी के सामने खुलकर तथ्यों को क्यों नहीं रखते। क्यों अभी भी फूल छाप पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए नीति बनाते हैं प्रदेश प्रभारी जितनी जल्दी ऐसे सलाहकारों से दूरी बना ले वास्तविक तथ्यों को देखकर नियुक्ति करें तभी वह अपने हाई कमान की झोली में छत्तीसगढ़ से कुछ लोकसभा सीट जीतकर दे सकेंगे।