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जिले में भाजपा के दो सत्ता केंद्र, एक के हवाले ओबीसी दूसरे के पास भाजपा का डीएनए हिंदुत्व

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बिलासपुर, 29 दिसंबर 2023।
बिलासपुर जिले की राजनीति में सत्ता के दो केंद्र बन गए दिखाई दे रहे हैं। इन दो केंद्रो ने पूर्व के दो केंद्र बिल्हा से धरम और बिलासपुर से अमर को हटाते हुए अपनी स्थापना की, एक केंद्र ओबीसी राजनीति का प्रतीक बनता है सहज रूप से इसकी कमान उपमुख्यमंत्री अरुण साव स्वयं है। दूसरा भारतीय जनता पार्टी की परंपरागत राजनीति सनातन और हिंदुत्व जो कोटा पराजित प्रत्याशी प्रबल प्रताप जुदेव से होता हुआ बेलतरा सुशांत शुक्ला तक आता है। भले ही यह सत्ता केंद्र अभी प्रभावी न दिख रहा हो पर भाजपा के डीएनए को यही प्रदर्शित करता है। जिले में अन्य कोई नेता हिंदुत्व की राजनीति इतनी प्रबलता से नहीं कर सकता। 80-20 का खेल, घर वापसी और सनातन धर्म का अविरल जयकारा लगाने की हिम्मत ना तो तखतपुर विधायक के पास है ना बिलासपुर और ना ही बिल्हा ऐसे में जसपुर से आकर कोटा में स्थापित होने वाले नेता की जड़े छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णु देव सहाय से सीधी जुड़ती है। और जंगल के रास्ते एकल विद्यालय की मजबूती, घर वापसी, चर्च पर कंट्रोल, भगवा की बयार इन्हीं के हाथों है। पूरे छत्तीसगढ़ को भाजपा ने दो हिस्सों में बांटा है एक छोर में हिंदुत्व का नेतृत्व विजय शर्मा के हाथों में है क्योंकि उन्होंने कवर्धा में मोहम्मद अकबर को परास्त करके भगवा का झंडा लहराया है। दूसरी ओर कोटा में भले ही प्रबल प्रताप पराजित हुए पर घर वापसी अभियान उन्हीं के हाथों में है ऐसे में जयपुर से बिलासपुर एक केंद्र और दूसरा कवर्धा से रायपुर।
हिंदुत्व की इन दो पाटों के बीच किसी अन्य का सत्ता केंद्र बिलासपुर में बन ही नहीं सकता। बिलासपुर जिले में भाजपा की भविष्य की राजनीति युवा के हाथ में जाएगी इस 55 प्लस वाले चाह कर भी नहीं रोक सकते। मंत्रिमंडल गठन से यह स्पष्ट हो चुका है ऐसे में क्या नवनिर्वाचित विधायक भले ही वे पूर्व में कितनी बार जीत चुके हो अपनी उपयोगिता बनाए रखने के लिए नए तरीके से कामकाज करना होगा। इसके संकेत सबसे पहले बिलासपुर नगर पालिका प्रधान बिलासपुर विधानसभा में दिखाई दिया जब बिलासपुर विधायक ने बेलतरा विधायक को इग्नोर करते हुए निगम में बैठक ली कहने को तो बिलासपुर निगम में बिल्हा के वार्ड भी हैं, बेलतरा और तखतपुर के भी हैं और मस्तूरी के भी हैं। मस्तूरी में कांग्रेस विधायक होने के कारण उसे हटा भी दें तो तीन स्थानों पर भाजपा विधायक हैं ऐसे में बिल्हा, तखतपुर को छोड़ भी दे जहां से एक या दो वार्ड निगम में आते हैं किंतु बेलतरा क्षेत्र से 14 वार्ड निगम में आते हैं ऐसे में जिस बिलासपुर विधायक ने चुनाव के पूर्व अपने घोषणा पत्र में पृथक से अरपा पार नए निगम की घोषणा की थी उनके द्वारा बैठक में बेलतरा विधायक के साथ संयुक्त बैठक ना करना चर्चा का विषय बन गया। और यहीं से अरपा के इस तरफ और उस तरफ इस चर्चा को हवा मिली की एक ही राजनीतिक दल के दो विधायकों के बीच सब कुछ ठीक नहीं ठीक नहीं है।