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1 एमपी नहीं 15 लाख नागरिक सस्पेंड, क्या यही है लोकतंत्र का मंदिर
- By 24hnbc --
- Monday, 18 Dec, 2023
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बिलासपुर, 19 दिसंबर 2023।
1 दर्जन 2 दर्जन 3 दर्जन गणित कठिन हो जाएगा सीधा समझे 141 एमपी निलंबित कर दिए इसे लोकतंत्र का निलंबन कहे या लोकतंत्र का शुद्धिकरण। तीन राज्यों की जीत के मद में मोदी सरकार का व्यवहार ही बदल गया। 1 सांसद के निलंबन का अर्थ 15 लाख मतदाताओं का निलंबन कहा जा सकता है। इस संदर्भ में कांग्रेस के युवा नेता टाकेश्वर पाटले कांग्रेस के किसान नेता कमल डहेरिया एनसीपी के प्रवक्ता निलेश बिसवास का कहना है कि असल में लोकतंत्र में जिस तरह की तानाशाही चल रही है वह तीन राज्यों के विधानसभा के पीठासीन अधिकारियों को संदेश है कि उन्हें अपने-अपने राज्यों में विपक्षी सदस्यों के साथ ऐसा ही व्यवहार करना है। सभी नेताओं ने माना कि इन दिनों भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में गुजरात विधानसभा को अपना आदर्श मान लिया गया है। और जनहित के चर्चा के स्थान पर विपक्ष का मुंह बंद करने को हथियार बनाया गया है। इतना ही नहीं विरोध में नारे लगाने पर भी जुर्माना लगाया जा रहा है ताजा उदाहरण जेएनयू परिसर का है जहां पर नारा लगाए जाने पर 20 हजार का जुर्माना ठोकने का आदेश जारी हुआ है।
चर्चा में नेताओं ने कहा कि तानाशाही नहीं चलेगी मुख्यमंत्री जी होश में आओ, मुर्दाबाद आदि के नारे लोकतंत्र में विरोध के सामान्य तरीके हैं इसे भारतीय जनता पार्टी ने बदला और सबसे पहले विरोध स्वरूप धार्मिक पाठ शुरू किया उन्हें यह पता था कि लोकतंत्र का वास्तविक जानकारी धर्म को राजनीति का विषय नहीं बनाएगा और अब साधारण नारेबाजी पर भी विश्वविद्यालय से लेकर सदन तक मुंह बंद कराया जा रहा है। आज मोदी सरकार के तौर तरीकों का साधारण जनता ने यदि विरोध नहीं किया तो सड़क पर शासन प्रशासन लोकतंत्र के सामान्य तौर तरीके को भी कुचलने लगेगा। बुलडोजर कहीं दिखाई देता है कहीं मानसिकता में बसा होता है। और इस तरह निलंबन के माध्यम से निकाला है नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के आदर्श तानाशाही शासन होते हैं बहुदलीय लोकतंत्र की जगह एक दलीय लोकतंत्र पर उन्हें ज्यादा भरोसा है। चीन के सोवियत संघ और पुराना जर्मनी उन्हें अच्छा लगता है उसे ही लागू करना उनकी इच्छा है। आम जनता उनके तौर तरीके को समझ रही है आने वाले समय में उन्हें और उनकी ईवीएम को सबक सिखाएगी।


