No icon

24hnbc

मिशन की जमीनों को वह कैसे बचाएंगे, जिनका नहीं है लोकस

24hnbc.com
बिलासपुर, 8 जुलाई 2026। 
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) और UCNITA की संपत्तियों को लेकर जो खबरें सामने आ रही हैं, वे किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रही हैं। चर्च की ऐतिहासिक जमीनों को अपनी निजी जागीर समझकर बेचा और बर्बाद किया जा रहा है। समुदाय की वर्षों पुरानी धरोहर अब भू-माफियाओं और राजनीतिक रसूख वाले लोगों की भेंट चढ़ रही है।
सत्ता की धमक और एजेंट्स का ‘खेल’
चर्च के भीतर फैली इस गंदगी के पीछे UCNITA के भीतर बैठे वे तत्व हैं जिनके सीधे कनेक्शन एजेंट्स से हैं। सत्ता की इस धमक का ऐसा असर है कि चर्च की बेशकीमती जमीनें बिना किसी वाजिब विरोध के सरकार के हवाले की जा रही हैं। ये लोग पूरी बेशर्मी से सरकारी लाभ उठा रहे हैं और चर्च की जमीनों को कौड़ियों के दाम बेचने का व्यवस्थित जाल बिछा चुके हैं। क्या यह इत्तेफाक है कि इनके प्रभाव में आने के बाद से ही चर्च की संपत्तियों पर गिद्धों की नजर पड़ गई है?
 
पवित्र परिसरों का अपमान: अब चर्च नहीं, ‘व्यापारिक अड्डे’
हद तब हो गई जब चर्च की पवित्र जमीनें जयदीप रॉबिंसन जैसे एजेंट्स के हवाले कर दी गईं। अब इन जगहों पर न प्रार्थना होती है, न मिशन का काम। यहां शादियां हो रही हैं, डीजे बज रहे हैं, मीना बाजार सज रहे हैं और हिंदू रैलियों के लिए ये स्थान इस्तेमाल किए जा रहे हैं। जिस जगह को कभी पवित्र माना जाता था, उसे आज खुलेआम बाजार और राजनीतिक अड्डा बना दिया गया है।
 
इन संपत्तियों को किया जा रहा बर्बाद
सिर्फ एक महीने के भीतर छत्तीसगढ़ में पांच से अधिक संपत्तियों का सत्यानाश कर दिया गया है। यह सूची लंबी और शर्मनाक है:
 1 ग्रास मेमोरियल ग्राउंड (रायपुर)
 2 जेकमेन मेमोरियल अस्पताल (बिलासपुर)
 3 बॉम्बे विल्सन जिमखाना (मुंबई)
 4 क्रिश्चियन कॉलेज (इंदौर)
 5 सीएनआई चर्च ग्राउंड (रतलाम)
 6 मदकु घाट द्वीप (शिवनाथ नदी)
 7 सेंट पॉल स्कूल “ग्रेस चर्च” (रायपुर)
 8 सीएनआई चर्च पिथौरा ग्राउंड (महासमुंद)
 9 मिशन बॉयज़ हॉस्टल (बिलासपुर)
 10 यूसीएमएस भूमि, तारबहार (बिलासपुर)
 11 सेंट ऑगस्टीन एंग्लिकन चर्च (बिलासपुर)
                                                                                           ये हैं वो ‘जिम्मेदार’ जो सब देख रहे हैं
UCNITA का पूरा निदेशक मंडल आज कटघरे में खड़ा है। क्या इन लोगों को अपनी नाक के नीचे हो रही इस लूट 
दिखाई नहीं दे रही?
 
कब तक चलेगा यह तमाशा?
इन ऐतिहासिक संस्थाओं को मिशनरी सेवा के लिए बनाया गया था, न कि इन स्वार्थी तत्वों और उनके चहेते एजेंटों की जेबें भरने के लिए। अब देखना यह है कि CNI भवन, दिल्ली में बैठे मॉडरेटर और मुंबई ऑफिस के UCNITA वाले कल 9 जुलाई को रायपुर में गैस मेमोरियल ग्राउंड के लिए विरोध जताएंगे या फिर जिस तरह CNI भवन को “पॉल दिनाकरण” को करोड़ों रुपये के किराए पर दे रखा है, उसी प्रकार किसी और जमीन को निपटाने की तैयारी में व्यस्त रहेंगे।
वक्त आ गया है कि इस पूरे गोरखधंधे की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार व्यक्तियों को बेनकाब किया जाए। समुदाय अब और चुप नहीं रह सकता।