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सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार पर लगाया दो लाख का जुर्माना

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बिलासपुर, 22 जून 2026 
देश की सर्वोच्च अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें जमीन मालिकों को दिए गए बढे हुए मुआवजे और ब्याज को चुनौती दी गई। इन मालिकों के जमीन पर पीडब्ल्यूडी ने बिना किसी अधिग्रहण के 25 साल से कब्जा कर रखा था। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई के बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और जमीन मालिकों को 5380 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा देने का निर्देश दिया। पूरा मामला दुर्ग जिले की जमीन का है पीडब्ल्यूडी ने 1986 से जमीन पर कब्जा कर रखा था। बिना किसी औपचारिक अधिग्रहण के सड़क का निर्माण कर डाला। 3 मई 2006 को सीमांकन की भीम के दौरान यह अतिक्रमण सामने आया। इसके बाद 1894 के लैंड एक्टक्विजीशन एक्ट की धारा 4 के तहत नोटिफिकेशन जारी हुआ। 10 में अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई। 9-10 की गाइडलाइन के अनुसार 4308 प्रति वर्ग मीटर मुआवजा तय किया गया। हाई कोर्ट ने मार्केट वैल्यू को सही ठहराया। मुआवजा बढ़कर 5380 प्रति वर्ग मीटर किया। अधिग्रहण नोटिफिकेशन के प्रशासन की तारीख से पहले 1 साल के लिए 9%, और उसके बाद भुगतान होने तक 15% सालाना ब्याज का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा जमीन मालिक 2 सितंबर 2006 से ब्याज पानी का हकदार हैं। राज्य ने बगैर मुआवजा उनकी जमीन पर सालों कब्जा कर के रखा। और उन्हें मुआवजे से वंचित रखा। उच्चतम न्यायालय का यह आदेश राज्य सरकारों की भूमि अधिग्रहण संबंधी मनमानी को फायदा दिखता है