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राज्यस्तरीय उड़नदस्ता से हो जाँच, स्थानीय ग्रामीणों की मांग

धमनी जंगल मे सागौन के पेड़ कटने वाला वायरल गुगलमैप वीडियो मे ही 150 से अधिक कटे पेड़ो के ठूँठ, विभाग अपनी जाँच मे बता रहा मात्र 25

24hnbc.com
बलौदाबाजार, 20 जून 2026। 
 जिले के बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र अंतर्गत धमनी और मुड़ियाडीह बीट में दो सौ से अधिक सागौन वृक्षों की कथित अवैध कटाई के मामले में खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग हरकत में आया है। हालांकि विभागीय जांच पर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे महज औपचारिकता और लीपापोती करार दिया है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में किए गए संयुक्त निरीक्षण के दौरान विभाग ने कुल 25 सागौन वृक्षों के ठूंठ मिलने की पुष्टि की है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 6 ठूंठ हाल ही में काटे गए पाए गए हैं। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक है और विभाग उच्च अधिकारियों को बचाने के लिए कटे हुए पेड़ों की संख्या कम बताकर मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है।सूत्र बताते है कि विभाग द्वारा ग्रामीणो के ऊपर यह शर्त रखा गया है यदि जंगल के पेड़ो की कटाई ज्यादा संख्या मे हुआ है बाते सार्वजनिक किया जाता है तो फिर आप सभी ग्रामीणों का जंगल मे आवागमन बंद कर दिया जायेगा। अनेक प्रकार से सहमति ग्रामीणों से लेने का प्रयास किया गया है। जंगल मे घुसना पूरी तरह से प्रतिबन्ध लग जायेगा जिससे जलाऊ लकड़ी, सूखे गोबर एवं अन्य सहयोग बंद हो जायेगा तमाम इन शर्तों के आधार पर ग्रामीणों मे सहमति लिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सागौन कटाई का पूरा सच सामने आ सकता है। उनका आरोप है कि विभाग केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है, जबकि बड़े अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जंगल में किसी भी घटना के बाद ही वन विभाग ग्रामीणों से संपर्क करता है। सामान्य दिनों में वन प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याओं और अधिकारों की अनदेखी की जाती है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब विभागीय कर्मचारियों पर ही अवैध कटाई कराने के आरोप लग रहे हैं, तब अचानक ग्रामीणों को वन प्रबंधन समिति में शामिल करने और विभिन्न योजनाओं का लाभ देने की बातें क्यों की जा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मुड़ियाडीह वन प्रभावित गांव है, लेकिन अब तक गांव के लोगों को विभाग की ओर से कोई विशेष लाभ नहीं मिला। उन्होंने पूछा कि आखिर अब तक वन विभाग ने गांव के विकास और आजीविका के लिए कौन-कौन से कार्य किए हैं।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होनी चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई तो वे जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के समक्ष आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
 
*प्रमुख मांगें*
-राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम से पुनः जांच कराई जाए।
-कटे हुए सागौन वृक्षों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक की जाए।
-जांच रिपोर्ट को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाए।
-दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
-वन प्रभावित गांवों को योजनाओं का वास्तविक लाभ दिया जाए।
 
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर खबर सामने आने के बाद ही वन विभाग क्यों सक्रिय हुआ? क्या विभागीय जांच सच्चाई उजागर करेगी या फिर यह मामला भी कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा?