200 पन्नों के आदेश ने तय किया , पुलिस क्या करेगी कैसे करेगी
जो अपनी मर्जी से कर रहा है सेक्स व्यापार उसे हिरासत में नहीं लिया जाएगा.... सुप्रीम कोर्ट
- By 24hnbc --
- Monday, 01 Jun, 2026
24hnbc.com
बिलासपुर, 2 जून 2026।
हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत ने सेक्स वर्कर के ऊपर 297 पन्ने का एक आदेश पारित किया है। इस आदेश की सबसे अच्छी बात यह है कि सेक्स वर्कर्स को सामान्य नागरिक का हर अधिकार प्राप्त है और उसे अधिकार का सम्मान सबको करना होगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है जो महिलाएं अपनी मर्जी से सेक्स वर्कर बने रहना चाहती है उन पर कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मानव तस्करी कर सेक्स वर्कर में धकेली गई महिलाओं को रेस्क्यू करते समय समाज की मुख्य धारा में लाने के पहले उनकी मर्जी जानना जरूरी है। जो अपनी मर्जी से सेक्स वर्कर बनी रहना चाहती है उन्हें जबरदस्ती नहीं किया जा सकता। धोखे से या जबरदस्ती देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता है तभी अनैतिक व्यापार रोकथाम एक्ट आईटीपीए के तहत कार्यवाही होगी।
मुख्य धारा में वापसी की प्रक्रिया जबरदस्ती नहीं की जा सकती, इसके पहले ऐसा करने के लिए सेक्स वर्कर की सहमति लेना जरूरी है। आईटीपीए की समीक्षा करते हुए कोर्ट ने कहा है कि इस कानून का मकसद ना तो वेश्यावृत्ति को खत्म करना है ना ही इस अपराध बनाना है। बल्कि इसके व्यवसायीकरण को रोकना है। अर्थात वेश्यावृत्ति को संगठित रोजगार का साधन बने से रोकता है। सेक्स वर्कर को तीन ग्रुप में रखा गया है।
पहला जिसमें लड़कियों या महिलाओं को तस्करी कर कर लाया जाता है उनकी मर्जी के खिलाफ उनसे सेक्स व्यवसाय कराया जाता है। ऐसी महिलाएं जो तस्करी कर कर लाई गई और अपनी मर्जी से दे व्यापार कर रही है तीसरी कैटिगरी वह महिलाएं जो अपनी मर्जी से इस व्यवसाय में है और बने रहना चाहते हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इन तीनों कैटेगरी के सेक्स वर्कर पर रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन का एक सा तरीका लागू नहीं होगा।
कोर्ट ने दोहराया है जो महिलाएं अपनी मर्जी से सेक्स वर्कर का काम करती है और वयस्क है उन्हें रेस्क्यू और हिरासत की प्रक्रिया से छूट देना चाहिए। ऐसे में कोठे पर छापामारी के दौरान उन लोगों को हिरासत में नहीं लेना चाहिए जो अपनी मर्जी से देह व्यापार में शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने कोठे पर छापामारी के प्रक्रिया तय किए हैं। मौखिक या शारीरिक रूप से बादशलुकी नहीं की जाएगी। किसी से बेमतलब शारीरिक बल प्रयोग नहीं होगा। कोर्ट ने ऑपरेशन के दौरान किसी तरह की फोटोग्राफी, और वीडियो ग्राफी पर रोक लगाई है। इस तरह इस आदेश से मीडिया को भी उसके हद में रहने की चेतावनी दी गई है।


