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सब की तर्ज पर कबाड़ का धंधा भी अब है डिजिटल

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बिलासपुर, 23 मई 2026।
गांजे पर लगातार कार्यवाही और सफलता के बीच पुलिस ने अचानक शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण थाने तक 1 ,2, 3 नहीं 40 से अधिक कबाड़ियों पर कार्यवाही कर दी कबाड़ियों के खिलाफ अचानक इतनी सक्रियता...? एक न्यूज़ साइड डंकाराम ने ऐसी कौन सी खबर लगा दी की जिले से आला अधिकारी को नीचे तक कार्यवाही का निर्देश देना पड़ा। कबाड़ धंधे का तौर तरीका पूर्व जैसा नहीं बचा है सब डिजिटल हुए तो यह धंधा भी अब तकनीक के साए तले चलता है। फ्रेंचाइजी यहां भी है, एस एन एफ, डिस्ट्रीब्यूशन कोरियर तक है पर पहला तरीका हाईवे से दूध रहो और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क, मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क पर ओपन सेड पास में तालाब हो तो अच्छा कबाड़ के साथ देसी मुर्गी का धंधा भी करो, माल कलेक्शन के लिए छोटे रिक्शे का उपयोग करो और धंधे को नगद के स्थान पर वस्तु विनिमय से करो। 
इन सब छोटी-छोटी तकनीक को अपनाकर कबड्डी नए सिरे से कम कर रहे हैं। पहले जो दिग्गज शहर में नामचिन थे अब दूर हो गए हैं। कभी एक जाति विशेष का पर्याय कबाड़ गंगा अब ओपन फार आल है। पहले सेल्टर केवल थाना था अब राजनीति भी है जिले में बड़ी फैक्ट्रियां और एनटीपीसी के आने के बाद देसी कबाड़ी तो छोटे पर बाहर से बड़े कबाड़ी आए इसका एक उदाहरण पड़ोसी जिले के एक बंद सरकारी सीमेंट फैक्ट्री है इसका कबाड़ का राष्ट्रीय टेंडर हुआ और लेने वाले ने सब डिलरसीप बांट दी। देखते देखते यह सीमेंट फैक्ट्री जिसमें जापान और जर्मन तक का लोहा था कट चुकी है। 
आश्चर्य की बात इस फैक्ट्री से निकलने वाले किसी भी ट्रक को चाहे वह गेट पास वाला हो या ना हो कभी नहीं पकड़ा गया जबकि यहां कबाड़ की अंतरराष्ट्रीय गड़बड़ी चल रही थी।