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दहेज हत्या के आंकड़े खोल देते हैं हिंदू संस्कृति की पोल

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बिलासपुर, 23 मई 2026।
अमृत काल के भारत में वर्ष 2024 में दहेज ने करीब 5737 महिलाओं की जान ली, यानी हर दिन 15 से 16 बहू बेटियों ने जान दी। सबसे ज्यादा मौत उत्तर प्रदेश 2038, बिहार 1078 मौत लेकर दूसरे नंबर पर है। अभी तो भोपाल की त्विशा शर्मा का नाम हाइलाइटेड है। तीसरे नंबर पर देश का हृदय मध्य प्रदेश है यहां पर 450 मौत हुई। चौथे नंबर पर राजस्थान 386, आंकड़ों के अनुसार 2017 से 2022 के बीच हर साल औसतन 7000 महिलाएं अपनी जान दे रही हैं। वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 6450 है। दहेज से जुड़ी आत्महत्या के मामलों में 2023 से 2024 के बीच 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 23 में यह मामले 1587 थे और 2024 में 1693 हो गए। यह तो वे मामले हैं जो थानों में दर्ज हुए। जाने कितने ऐसे मामले हुए होंगे जो थाने तक नहीं पहुंचे। 
तो हिंदू समाज की बेटियों को लव जिहाद से ज्यादा खतरा तो अपनी ही दहेज प्रथा से है पर कितने हिंदू संगठन और कितने हिंदू नेता अपनी बेटियों को बचाने के लिए सामने आते हैं। उन्हें तो डर लव जिहाद से लगता है दहेज प्रथा से नहीं... हम जानते हैं जब हम लिख रहे हैं जब हम यह लिख रहे हैं तो हमारी खूब आलोचना हो सकती है। निक्की हो मनीषा हो या कोई और बिटिया उन्हें किसी शाहिद , असलम, निजाम से ज्यादा खतरा तो समर्थ जैसे लोगों से है। भोपाल में त्विशा के पापा ने 10 दिन तक अपनी बेटी का शब सुरक्षित रखवाया। डबल इंजन सरकार के कम से स्पष्ट कहा हमें आपकी जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं पर मध्य प्रदेश भोपाल का यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर ओवैसी सुर्खी नहीं पाया जैसी सुर्खी गैर भाजपा शासित राज्यों में बन जाती है। हमारा मीडिया बुरी तरीके से एक गोद विशेष में बैठ गया है और उसका पूरा चश्मा केवल हिंदू मुसलमान को देख रहा है। इतना ही नहीं इसमें एक घटना और जोड़ें बिलासपुर में भारतीय जनता पार्टी की एक बड़ी नाम चिन नेता के साथ बलात्कार हो गया उन्होंने इस आशय की शिकायत संबंधित थाने में भी कराई और पुलिस ने आरोपी को झारखंड से हिरासत में लिया। 
इस पूरे मामले की रिपोर्टिंग स्थानीय अखबारों में बहुत साधारण तरीके से हुई। क्या कारण है कि हम महिलाओं के प्रति अत्याचार को भी राजनीतिक चश्मे से देखने लगे हैं।