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सीएनआई पद के साथ, मसीही बाइबल के साथ

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रायपुर/बिलासपुर, 28 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी बिल को लेकर एक ओर जहां लाखों मसीही समुदाय के लोग तपती धूप में, अपने खर्च पर, भूखे-प्यासे रायपुर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और राज्यपाल को ज्ञापन सौंप रहे थे, वहीं दूसरी ओर उसी दिन CNI के नेतृत्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उसी दिन CNI की बिशप द्वारा एक निर्देश जारी किया गया, जिसमें सभी पास्टरों और चर्च के सदस्यों को कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए कहा गया। यह आयोजन स्कूल बोर्ड चुनाव से संबंधित बताया गया, जिसमें आने-जाने का किराया और भोजन की व्यवस्था भी कराई गई थी।
इसी दिन शाम को, CNI की बिशप और उनके सचिव द्वारा राज्यपाल से मिलने का निवेदन प्रस्तुत किया गया। इस निवेदन में कथित रूप से धर्मांतरण विरोधी बिल के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया और राज्य सरकार, विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ खड़े होने की बात कही गई।
यह स्थिति एक बड़ा विरोधाभास प्रस्तुत करती है। एक ही स्थान और समय पर, एक ओर लाखों मसीही समुदाय के लोग इस बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, जबकि दूसरी ओर CNI का नेतृत्व उसी बिल के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है।
आलोचकों का यह भी आरोप है कि पूर्व में भी CNI नेतृत्व की भूमिका को लेकर गंभीर प्रश्न उठते रहे हैं। उनका कहना है कि मुंबई का विल्सन कॉलेज जिमखाना, इंदौर का क्रिश्चियन कॉलेज, बिलासपुर का मिशन अस्पताल और रायपुर का गौस मेमोरियल ग्राउंड जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को सरकार के हाथों में आसानी से जाने दिया गया। अब आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि CNI नेतृत्व सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि सरकार की नजर मसीही समुदाय की बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों पर है।
इन घटनाओं के बाद मसीही समुदाय के भीतर असंतोष और सवाल दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और समुदाय के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।