किसे कर रहे हैं खुश
शंकराचार्य प्रकरण में हिंदी चैनलों ने खुलकर उड़ाई कानून की धज्जी
24hnbc.com
बिलासपुर, 26 मार्च 2026।
शंकराचार्य मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय फैसले में मीडिया के लिए बहुत कुछ कहा गया है। कोर्ट ने हिंदी न्यूज़ चैनलों पर गंभीर सवाल खड़ा किया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहां है कि पीड़ितों के इंटरव्यू लेकर उनका प्रसारण किया गया जो की पाक्सो एक्ट और जूवेनाई जस्टिस कानून के स्थापित प्रावधानों का उल्लंघन प्रतीत होता है। यह टिप्पणी सिर्फ एक केस तक सीमित मानी जा रही बल्कि पूरे मीडिया आचरण और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करती है। टीआरपी की होड़ में कानून की बुनियादी सीमाएं लांघीं जा रही है।
अदालत की इस टिप्पणी के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि ऐसे मामलों में मीडिया की जवाब दे ही कैसे तय होगी। सवाल उठता है हिंदी न्यूज़ चैनलों ने यह सब क्यों किया किसके इशारे पर किया उन्हें कानून की बेसिक जानकारी है तब उन्होंने किसे प्रसन्न करने के लिए कानून और संविधान के स्थापित मान्यताओं का चीर हरण किया। आखिर कब तक सरकार की जयकारा करके अपना मूल काम त्याग कर पत्तलकारिता करेंगे।


