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यहोदा इस्करोति वर्तमान संदर्भ में

सामान्य ईसाई विधेयक के विरोध में, और डायोसिस दे रहा राज्यपाल को धन्यवाद

24hnbc.com
बिलासपुर, 28 मार्च 2026। 
छत्तीसगढ़ में धार्मिक स्वातंत्र विधेयक को लेकर मसीही समाज और छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत के बीच खाई स्पष्ट दिख रही है। एक तरफ जहां मसीही समाज सामान्य मसीही नागरिकों का प्रतिनिधित्व कर रहा है वही डायोसिस यहोदा इस्करोति के समान व्यवहार कर रहा है। इस पूरे मामले को समझने के पहले... इतिहास के संदर्भ को समझ लेना जरूरी है। रोमन सरकार को इस्करोति ने 30 चांदी के सिक्कों के एवरेज में यीशु मसीह को सौंप दिया। 
रोमन सरकार नहीं जानती थी यीशु मसीह कौन है। 30 से चांदी के सिक्के जुडास किस के लिए मिले यह ज़हरीला चुम्बन ले कर ही बताया गया कि यीशु मसीह कौन है। सहज प्रश्न उठता है 30 चांदी के सिक्के का हुआ क्या ..? इतिहास बताता है कि दोषी ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए जमीन खरीदी। ईसाई धर्म के मानने वाले आज भी इस जमीन के किस्से को अच्छे से जानते हैं। ओल्ड टेस्टामेंट में 39 किताब न्यू टेस्टामेंट में 27 कुल मिलाकर 66 किताब की बाइबल है इसके बावजूद 15 किताब गायक बताए जाते हैं जो बाद में इथोपिया में मिली। और ये 15 किताब मसीही समाज के संदर्भ में बहुत कुछ गुप्त बातें बताती हैं। 
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र विधेयक को लेकर पदाधिकारी और आम ईसाई दो भाग में बैठ गया है। क्रोनोलॉजी कुछ इस तरह है कि 27 मार्च को ही छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत का एक विवादित चुनाव हुआ। जो लोग जीते हैं वे सब अपंजीकृत डायोसिस से जुड़े हुए हैं। चुनाव जीतने के तुरंत बाद इन सभी ने राज्य के माननीय राज्यपाल को एक चिट्ठी लिखी और विधेयक का समर्थन किया। आम ईसाई दिनभर सड़क पर दिनभर इस विधेयक का विरोध कर रहा था। राज्य के भीतर ईसाई समाज की जितनी भी नजूल भूमि है उनकी लीज नवीनीकरण के स्थान पर निरस्त हो रही है। और किसी भी न्यायालय में इन कथित पदाधिकारी को, उनका स्टेटस ही नहीं मिल रहा है अधिकतर मामलों में लोकस खारिज किया गया। पहले जिला प्रशासन टिकडम करके चुनाव करती है। इन्हें विजेता घोषित करती है और बाद में किसी भी न्यायालय में इन्हें इनके लोकस को वैधता नहीं मिलती। और यही पदाधिकारी बेशकीमती जमीनों को सरकार के पक्ष में हार्ट जाते हैं इसे जोडास किश ही कहेंगे।