No icon

24hnbc

जिले में नायब तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक सब के कोर्ट में प्रकरणों की भरमार

24hnbc.com
बलौदाबाजार, 16 जनवरी 2024।
राजधानी से लेकर न्यायधानी कि यहां तक की नए जिले भी राजस्व विभाग की पेंडेंसी के रोग से ग्रस्त हो गए हैं। रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण हो या नामांतरण, बटवारा आवेदक प्रकरण पेश करने के बाद स्वयं नहीं जानता कि अंतिम आदेश कब होगा। आदेश हो भी गया तो आदेश के आधार पर ज्ञापन निकालना और ज्ञापन के आधार पर रिकार्ड दुरुस्त हो जाना आसान नहीं है। उलट इस तरह के भी उदाहरण है जब परिवर्तित भूमि क्रेता विक्रेता के मध्य नामांतरित होने के अतिरिक्त भी एक अन्य व्यक्ति के नाम पटवारी रिकॉर्ड में चढ़ा दी गई या मामला ग्राम पटघर तहसील भाटापारा जिला बलौदाबाजार का है। तो बलौदाबाजार में बटवारा, नामांतरण अवैध कब्जा के कुल 7000 से अधिक मामले तहसील एसडीएम कोर्ट एडिशनल कलेक्टर के पास लंबित हैं। एसडीएम कार्यालय में बाबू पटवारी के बीच ऐसा फ्रेंडली मैच चलता है जिसमें काफी हद तक अधिवक्ता भी शामिल होते हैं। इसमें सर्वाधिक मामले 3 से 6 महीने की अवधि वाले हैं। पलारी में 86, बलौदाबाजार 73, भाटापारा में 26 यहां तो दो से 5 वर्षों से लंबित प्रकरण की संख्या भी 24 है। बलौदाबाजार में तो 1 से 2 वर्ष से लंबित प्रकरणों की संख्या 56, 2 से 5 वर्ष तक लंबित प्रकरणों की संख्या 40 है। अवर कलेक्टर बलौदाबाजार भाटापारा भी इनमें पीछे नहीं है कल लंबित प्रकरण 932 में 2 से 5 वर्ष तक 21 प्रकरण लंबित हैं। न्यायालय कलेक्टर भी लंबित प्रकरणों में हल्के नहीं है। 1 से 2 साल तक लंबित प्रकरण 232, 5 से लंबित प्रकरण 190 हैं यह देखकर ऐसा लगता है कि तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक राजस्व मामलों की सुनवाई में दिलचस्पी नहीं रखते प्रशासनिक प्रबंधन के अतिरिक्त हर कलेक्टर पर निर्वाचित सरकार के घोषणा पत्र की योजनाओं का दबाव बहुत होता है उनके बावजूद न्यायालय अनिवार्य है। और निश्चित दिवसों पर बैठकर सुनवाई प्राथमिकता होनी चाहिए पर नहीं है और प्रशासनिक अधिकारियों का यह रवैया भूपेश सरकार हो, रमन सरकार हो या साय सरकार सब में एक सा रहता है।