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हरे मटर पर जनहित याचिका जबलपुर हाई कोर्ट कर रहा सुनवाई

 

 

जबलपुर, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर की ओर से एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसके जरिये जबलपुर के हरे मटर की अनदेखी को कठघरे में रखा गया है। साथ ही मटर को खाद्यान्न की श्रेणी निर्धारित न किए जाने पर भी सवाल खड़ा किया गया है। समर्थन मूल्य निर्धारण का बिंदु भी जनहित याचिका में समाहित है।नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, अनिल पचौरी व डॉ.एमए खान जनहित याचिकाकर्ता हैं। उन्होंने अवगत कराया कि जबलपुर का नाम देश में रोशन करने वाले मटर की जमकर अनदेखी हो रही है। आलम यह है कि मटर फसल अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जी आदि किसी भी श्रेणी में नहीं रखी गई है। इसलिए राजस्व रिकॉर्ड में धान, मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, गेहूं, चना, दलहन तो दर्ज हैं, लेकिन मटर नदारद है।खेती 90 हजार हेक्टेयर, दर्ज 15 हेक्टेयर : जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि जबलपुर के 90 हेक्टेयर में मटर बोया जाता है।