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यूपी सरकार ने कोर्ट में खाई मुंहकी चिन्मयानंद पर चलेगा बलात्कार का केस

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समाचार -
बिलासपुर, 3 अक्टूबर 2022 । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद सरस्वती के खिलाफ बलात्कार के एक मामले को वापस लेने की मांग करते हुए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत अभियोजन अधिकारी द्वारा अग्रेषित राज्य के एक आवेदन को अनुमति देने से इंकार करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की पीठ ने सरस्वती के खिलाफ मामला वापस लेने के फैसले पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई उन्होंने कहा की जिला मजिस्ट्रेट शाहजहांपुर आरोपी के खिलाफ अभियोजन वापस न लेने के लिए एक भी अच्छा कारण न दे पाए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सीआरपीसी की धारा 321 के तहत दायर इस तरह के एक आवेदन ने एक ठोस कारण होना चाहिए, जिसे लिखा जाना चाहिए अदालत ने वरिष्ठ लोक अभियोजक को भी फटकारा और नोट किया कि अभियोजक कार्यपालिका/ राजनैतिक महिमा के सामने झुक गया न्यायालय ने टिप्पणी की वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने यह भी उल्लेख नहीं किया कि उन्होंने किस सामग्री पर अपना स्वतंत्र दिमाग लगाया और यह निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन की वापसी न्याय के सिरों के हित में या बड़े पैमाने पर जनता के हित में होगी। 
मामले के जांच अधिकारी ने चिन्मयानंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 धारा 506 के तहत आरोप पत्र दायर किया संबंधित मजिस्ट्रेट ने दिसंबर 2011 में संज्ञान लिया उसके बाद चिन्मयानंद ने आरोप पत्र के साथ साथ समन आदेश को चुनौती दी जिस पर दिसंबर 2012 में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी मामले की कार्यवाही की ओर पीड़ित को नोटिस जारी किया गया यह अंतरिम आदेश 2018 तक चला जब चिन्मयानंद ने उपरोक्त 482 आवेदन को वापस लेने के लिए एक और आवेदन दिया 2012 के अंतरिम आदेश को रद्द करने की मांग की तदानुसार उक्त आवेदन पर विचार किया गया और खारिज कर दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि 16 फरवरी 2018 को जैसे ही 482 आवेदन खारिज हुआ उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अवर सचिव ने जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 6 मार्च 2018 के संचार से अभियोजन को वापस लेने के लिए यूपी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को संप्रेषित किया। वर्ष 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के बाद स्थितियों में बदलाव आया और कुछ ही समय के भीतर आवेदक के खिलाफ अभियोजन वापस ले लिया गया वह भी आईपीसी की धारा 376 के तहत एक जघन्य अपराध में, इस मामले में शिकायतकर्ता पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार चिन्मयानंद ने अपने बल से शारीरिक संबंध स्थापित किए उसके भोजन में कुछ नशीला पदार्थ मिलाया और उसके बाद उसे बेरहमी से तबाह कर दिया कथित तौर पर चिन्मयानंद ने अश्लील ऑडियो, वीडियो विजुअल वीडियो, अश्लील तस्वीरें भी ली और इस प्रक्रिया के दौरान उसने दो बार और पहली बार बरेली और दूसरी बाहर लखनऊ में उसका गर्भपात कराया इतना ही नहीं जब वह गर्भवती थी तो आवेदक के गुंडों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा दिए गए 482 का निराकरण करते हुए दिए गए आदेश के बाद अब स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के विरुद्ध 376 का मामला कायम रहेगा और कोर्ट उसकी सुनवाई करेगी।