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मस्तूरी तहसीलदार को उच्च न्यायालय से अवमानना नोटिस जारी

विवादित स्थल पर तहसीलदार की अधूरी कार्यवाही, एक शटर पर शासन की सील तो दूसरी तरफ से दुकान है खुली

24 HNBC  ( बिलासपुर  ) 
समाचार
बिलासपुर :- भूषण प्रसाद मधुकर विरुद्ध झड़ी राम के सिविल विवाद में मस्तूरी तहसीलदार परेशानी में पढ़ते नजर आ रहे हैं । एक तरफ उनके विरुद्ध अवमानना का प्रकरण दर्ज हुआ है जिसमें उन्हें उच्च न्यायालय में जवाब देना है दूसरी तरफ उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने विवादित स्थल पर जिस तरह से कार्यवाही की और झड़ी राम +13 विवादित भूमि पर निर्मित 14 दुकानों का कब्जा अनावेदक से प्राप्त कर दुकानें सील कर दी उसमें भी गड़बड़ नजर आ रही है। मुख्य मार्ग पर स्थित दुकानें तो सील है और उनमें व्यापारिक गतिविधियां भी नहीं चल रही किंतु गली के अंदर आखिरी दुकान का एक शटर में ताला लगा है शासन की सील है और दूसरा शटर खुला हुआ है तथा व्यापारिक गतिविधियां भी संचालित है। ऐसे में शासन की कार्यवाही पक्षपात पूर्ण नजर आती है वैसे भी उच्च न्यायालय का जो आदेश था उसमें स्पष्ट लिखा था कि आवेदक के पक्ष में अनावेदकों से कब्जा प्राप्त कर भूषण प्रसाद मधुकर को कब्जा दिलाया जाए। अपने पहले बेदखली वारंट में भी तहसीलदार ने स्वयं इस बात का उल्लेख किया है कि
और इसी को आधार बनाकर उन्होंने पुलिस बल भी मांगा था किंतु उस तारीख में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही नहीं की गई और लगभग 3 माह पश्चात दोबारा कार्यवाही की गई तो अवैध कब्जा धारियों को नोटिस दिया गया और प्रकरण के आवेदक को सूचना भी नहीं दी गई। अनावेदकों से तहसीलदार ने कब्जा तो प्राप्त कर लिया किंतु विवादित संपत्ति को शासन अधीन कर लिया इसी मामले में उच्च न्यायालय से अवमानना प्रकरण में बिलासपुर कलेक्टर और तहसीलदार मस्तूरी को नोटिस ईशू हुए हैं।