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किसी मामले में अति सक्रिय और किसी ने निष्क्रिय कैसे हो जाती है बिलासपुर पुलिस

24 HNBC    (बिलासपुर  ) 
बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस अपने ही द्वारा दर्ज किए गए प्रकरणों में कुछ पर बहुत तेजी से कार्यवाही करती है और आरोपी को राज्य की सीमा के बाहर जाकर भी हिरासत में लेकर आती है। जबकि कुछ मामलों में यही पुलिस बल इतना सुस्त गति से काम करता है कि आरोपियों को अग्रिम जमानत के लिए उच्चतम न्यायालय तक जाने का अवसर मिलता है ऐसा क्यों होता है। जानकारों का कहना है कि यही तो पुलिस पर राजनैतिक दबाव का खेल है। 
आइए हम इसे कुछ उदाहरणों के माध्यम से समझते हैं, हाल ही में तारबहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक आरक्षक की शिकायत पर कांग्रेस के ब्लाक प्रमुख के विरुद्ध ना केवल एफ आई आर दर्ज हुई बल्कि संबंधित थाना क्षेत्र का स्टाफ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष को पकड़ने के लिए नागपुर कामठी तक गया जबकि राजनैतिक दल का पदाधिकारी कोई हिस्ट्रीशीटर गुंडा मवाली नहीं था। जबकि इसके पूर्व भारतीय जनता पार्टी शासन काल में उस समय के भाजपा युवा नेता सुशांत शुक्ला का विवाद सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक महिला आरक्षक से हुआ दोनों पक्षों के बीच जमकर गर्मा गर्मी हुई और महिला आरक्षक की शिकायत पर सुशांत शुक्ला के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हो गई किंतु उस वक्त पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने में कोई रुचि नहीं दिखाई बाद में न्यायालय में मामला गया और उल्टा शासन ने आरोपी को जननायक बताते हुए जनहित में वापस लेने का आवेदन प्रस्तुत किया। भाजपा के शासनकाल में नगर पालिक निगम के एक अभियंता को कांग्रेस के दो नेताओं ने चेंबर में घुसकर मारा पीटा और अभियंता की शिकायत पर दोनों नेताओं के विरुद्ध सिविल लाइन थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई और गंभीर धारा 307 हत्या का प्रयास के तहत मामला दर्ज हुआ। एक पदाधिकारी हिरासत में लिया गया दूसरा गायब हो गया पुलिस ने उसे पकड़ने का कितना प्रयास किया यह तो पुलिस के अधिकारी ही बता सकते हैं । लेकिन आरोपी ने जो प्रयास किया उससे उसे अदालत से अग्रिम जमानत प्राप्त हो गई। बिलासपुर पुलिस की कार्यशैली सर्वाधिक चर्चित 376 के मामलों में होती है अभी कुछ साल के अंदर ही सीएमडी कॉलेज, डीपी विप्र कॉलेज और सेंदरी हॉस्पिटल के प्रोफेसर, चिकित्सक के विरुद्ध अलग-अलग महिलाओं ने एफ आई आर दर्ज कराई थी सभी मामले अलग-अलग थानों के हैं किंतु पुलिस की कार्यवाही लगभग 1 सी थी तमाम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इतनी भागदौड़ हुई की सभी आरोपियों को गिरफ्तारी के पहले ही विभिन्न न्यायालयों से अग्रिम जमानत प्राप्त हो गई । अभी पीडब्ल्यूडी के एक उच्च अधिकारी के विरुद्ध महिला ने 376 के आरोपों के साथ प्राथमिकी दर्ज कराई है प्राथमिकी दर्ज हुए 2 माह से अधिक हो चुका है किंतु गिरफ्तारी आज तक नहीं हुई लगता है की अलग-अलग मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली भिन्न-भिन्न तरह से चलती है अब एक बार फिर से बिलासपुर पुलिस अधीक्षक का तबादला हुआ है देखने लायक बात यह होगी कि आने वाले अधिकारी के नेतृत्व में जिला पुलिस कैसा प्रदर्शन करती है।