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83 भ्रष्ट क्लब के 35 सदस्य बिलासपुर में कैसे हो जनसेवा

24 HNBC  ( बिलासपुर  ) 
बिलासपुर । भ्रष्ट अधिकारियों का मामला कोई पहली बार उच्च न्यायालय नहीं पहुंचा है। इस बार याचिकाकर्ता ने राज्य के लगभग 83 ऐसे अधिकारी व कर्मचारियों की सूची मुख्य न्यायाधीश महोदय को पत्र के माध्यम से भेजी जिन पर एसीबी जांच कर रहा है। 83 कर्मचारी अधिकारी की सूची में लगभग 35 लोग बिलासपुर जिले के विभिन्न पदों पर बैठे हैं, विडंबना यह है कि जिस व्यवस्था में छत्तीसगढ़ चल रहा है वहां भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालय आदेश के बाद भी एफ आई आर नहीं होती इसके 2 मामले लिखने योग्य हैं। 
पहला गौरव पथ नगर पालिक निगम बिलासपुर के 17 भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डीबी ने ही एफ आई आर का आदेश दिया था किंतु जांच के नाम पर राज्य सरकार के सचिव ने इनको बचा लिया। और दूसरा मामला स्वास्थ्य विभाग की एक महिला अधिकारी मधुलिका जी का था जिसमें कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी थी कि वह चाहे तो संबंधित थाने में एफ आई आर दर्ज करा ले दोनों ही मामलों में एफ आई आर दर्ज नहीं हुई अर्थात जब कोर्ट ने राज्य सरकार को सीधे एफ आई आर दर्ज करने को कहा तब भी और जब याचिकाकर्ता को यह काम दिया गया तब भी दोनों स्थिति में एफ आई आर नहीं हुई। 
एक मामला ऐसा भी है जिसमें वर्ष 2002 मे एसीबी ने नगर पालिक निगम बिलासपुर में पदस्थ अभियंता सुधीर गुप्ता के विरुद्ध छापामार कार्यवाही की और उनके विरुद्ध चालान 2019 में प्रस्तुत हुआ इस दौरान अधिकारी को एक से अधिक बार पदोन्नति मिली और सब कुछ दूधीसंधि के तहत सेवानिवृत्ति के कुछ दिन पूर्व चालान प्रस्तुत हुआ बिलासपुर जिला सत्र न्यायालय से जमानत नहीं प्राप्त हुई लिहाजा अभियंता को जेल जाना पड़ा। नियमित जमानत मिलने के बाद ऐसे भ्रष्ट अधिकारी पर व्यवस्था इतनी मेहरबान होती है कि उन्हें तुरंत संविदा नियुक्ति प्राप्त हो गई ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार के खेल में केवल कांग्रेस के हाथ गंदे हो रहे हैं, 15 साल तक शासन करने वाली भाजपा भी कुछ कम नहीं थी। लूना जैसी 49 सीसी की गाड़ी में कई टन धान का परिवहन पुन्नूलाल मोहले और डॉक्टर रमन के मजबूत कंधों पर ही हुआ इस तरह कहा जा सकता है कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का खेल संयुक्त उपक्रम है। 83 महाभ्रष्ट अधिकारियों में से जिन 35 की नियुक्ति बिलासपुर में हैं उनके नाम नारायण प्रसाद गवेल जिन्हें हाल ही में पदोन्नति प्राप्त हुई है से शुरू होती है। 35 नाम इस प्रकार हैं निर्गुण दास मानिकपुरी, संतोष वर्मा, कौशलेश कुलमित्र, विजय भारत साहू, केपी पाटनवार, कौशल यादव, के के पाठक, आभा तंबोली, अचला तंबोली, आरएन हीराधर, अशोक भार्गव, संतराम कमलेश, जी एस सिंह, डीके श्रीवास्तव, यूके श्रीवास्तव, संतोष गुप्ता, उषा तिवारी, संतोष तिवारी, एके सोमवार, संजय पाठक, प्रकाश चंद साहू, सूर्यकांत मानिकपुरी, सूर्यकांत माणिक, धन सिंह पटेल, आनंद पांडे, ओम पांडे, श्याम चंद पटेल, दिनेश दुबे, लाल बहादुर कश्यप, हरमन खलखो, प्रदीप शुक्ला, व पितांबर साहू इस तरह बिलासपुर केवल न्यायधानी नहीं भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एसगाह संरक्षण स्थलीय भी बन गई है ।