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संस्कार नहीं गंदी व्यावसायिक मानसिकता से चलता है नर्सिंग होम

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बिलासपुर, 24 जनवरी 2026। 
देश में बढ़ें नागरिक संख्या पर एक डॉक्टर की स्थिति है जब पूरा समाज पैसे को ही प्राथमिकता दे रहा है। तो डॉक्टर को ईश्वर का दूसरा स्वरूप कहना बेकार है। गली गली, मोहल्ले मोहल्ले, ब्लॉक ब्लॉक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल खुले हैं। सरकार का दावा है इलाज आयुष्मान कार्ड से होता है डॉक्टर कहते हैं नहीं इलाज तो हमारे डिग्री के दर्शन से होता है। बिलासपुर सिम्स स्थित संविदा डॉक्टर एक साथ तीन-तीन, चार चार जिलों के अस्पतालों को सेवा प्रदान करते हैं। असल में इन अस्पतालों में वे केवल अपने सर्टिफिकेट देते हैं। निर्धारित दिन निर्धारित समय यह महान युवा चिकित्सक उसे अस्पताल में हो जरूरी नहीं है कई बार तो उनके नाम के कारण एंबुलेंस वाला मरीज को अस्पताल ले जाता है। अस्पताल में उपस्थित नीम हकीम, खतरे जान मरीज को डॉक्टर आ रहे हैं कह कर ओटी में ले लेता है और उसके बाद मरीज ओटी से जिंदा नहीं निकलता। बलौदा बाजार कशडोल, मस्तूरी, जांजगीर-चांपा में ऐसे कई उदाहरण है। मरिज पैदल चलकर अस्पताल पहुंचा और ऐसे डॉक्टरों की कृपा से उसका पार्थिव शरीर ओटी से बाहर आया। वर्तमान में ऐसे ही अपराधिक प्रकरण की जांच गिधौरी थाना में हो रही है कुछ षड्यंती जेल में है केवल शैक्षिक प्रमाण पत्र अस्पताल में जमा करने वाले डॉक्टर मजे से बाहर घूम रहे हैं और दावा करते हैं कि संबंधित ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी और व्यवस्था तो उनकी जेब में है। कुछ चिकित्सक तो संबंधित विभाग के मंत्री को अपना मितान भी बना देते हैं।