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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का हो रहा निजीकरण

स्वास्थ्य मंत्री किसके कहने पर कीले ठोंक रहे हैं अपने ताबूत में

24hnbc.com
बिलासपुर, 5 सितंबर 2026।
यह एक ही मुद्दा बिलासपुर जिले से भाजपा का सफाया कर देगा। 200 करोड़ रुपए से अधिक का आम जनता का पैसा सरकार ने बिलासपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में लगाया फिर उसका नामकरण दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर कया अब इस अस्पताल को पीपीपी कहे जाने वाले कथित मॉडल को हैंड ओवर किया जाएगा। जैसे ही यह होगा यहां जो इलाज₹10 की लागत से शुरू हो जाता है वह बदलकर गरीब के लिए 450 रुपए और सामान्य व्यक्ति के लिए ₹600 ओपीडी हो जाएगा। यह दर वर्तमान में जगदलपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में चल रही है और इस अस्पताल का संचालन कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद के द्वारा किया जा रहा है। कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कोई रेड्डी बंधु कोनी के अस्पताल को भी ठेके पर ले ले। बिलासपुर में इस अस्पताल के हस्तांतरण के खिलाफ जन चेतना एक बार अपना रुख दिख चुकी है पर सरकार में बैठे नेता और नौकरशाह है कि उनकी ना तो आंख खुलती है और जमीर तो मर ही चुका है। कुछ सोशल एक्टिविस्ट का मानना है कि ऊपर का दबाव ही कुछ ऐसा है कि यह अस्पताल बिक्री के लिए तैयार है। पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) कैसे कहा जा सकता है जब पूरा पैसा आम जनता का लगा। संचालन का पूरा पैसा आम जनता के टैक्स से जाता है। इस अस्पताल में अब तक 9 करोड रुपए तो सीएसआर मद से लग चुका है तो किसी भी प्राइवेट कंपनी ने या पीव्हीटी एलटीडी ने इस अस्पताल में एक ढ़ेला खर्चा नहीं किया और उसे संचालित करने आ जाएगी और बिलासपुर के नागरिक सरकार के इस जुर्म को सह लेंगे। वर्तमान में बिलासपुर की कुल विधानसभा सीट में से केवल दो सीट कांग्रेस के पास है और सांसद भी भाजपा का है। कोई बड़ी बात नहीं 28 के चुनाव में भाजपा का एक-एक विधायक बुरी तरह से हारेगा क्योंकि आम जनता के पास महंगाई के वज्रपात के बाद यदि उसकी स्वास्थ्य सुविधा भी छीन ली गई तो परिणाम तो सत्ताधारी दल को भुगतना ही पड़ेगा।
इस अस्पताल के निजी क्षेत्र में जाने के बाद नुकसान केवल बिलासपुर के नागरिकों का नहीं है इस अस्पताल में मध्य प्रदेश से भी मरीज आते हैं तो नुकसान तो छत्तीसगढ़ के बाहर भी होगा।