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कॉकरोच है सदा के लिए, व्यक्ति आते जाते हैं

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बिलासपुर, 17 मई 2026।
व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे लोगों को नीचे के लोग कीड़े मकोड़े ही नजर आते हैं। हमारे एक वरिष्ठ मित्र है उन्होंने अपनी साधारण कर स्विफ्ट छोड़कर टोयोटा फॉर्च्यूनर ले डाली, दो माह के बाद मुलाकात हुई हमने बधाई दी तो वे बोले फॉर्च्यूनर को बेचने वाला हूं। हमने कारण पूछा तो उन्होंने कहा... सीट पर बैठकर ऐसा लगता है कि अन्य लोग कीड़े मकोड़े हो गए , एक साधारण फॉर्च्यूनर पर सवार होने से जब बाहर का आदमी कीड़ा मकोड़ा दिखाई देता है तो यह स्थिति बता देती है कि व्यवस्था के अंदर जब सर्वोच्च पद पर लोग बैठते हैं तो व्यवस्था के बाहर का आदमी जिसके पास पूछने की ताकत है वे उसे कॉकरोच और परजीवी ही नजर आते हैं। 
मनोवैज्ञानिक बीमारी किसी को भी हो सकती है और इस किसी में हमारे द्वारा बनाए हुए मिलाड़ और हमारे द्वारा बनाए गए प्रधानमंत्री महामानव भी शामिल हैं। ऊंची कर की सीट हो या पद शेष लोग चुभने लगते हैं। वहां बैठे आदमी को केवल भक्ति ही अच्छे लगते हैं। पर हम सोचे की अंतरिक्ष यात्रा कर रहे अंतरिक्ष यात्री को, अपना अपना देश है तुक्क्ष क्यों नजर नहीं आता। देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब राकेश शर्मा अंतरिक्ष यात्री से पूछा की ऊपर से भारत कैसा दिखाई देता है तब शर्मा जी ने किस भाव से कहा सारे जहां से अच्छा.... हम मानते हैं कि असल में खेल प्रश्न पूछने वाले का है। यदि प्रश्न पूछने वाला ताकतवर है तो ऊपर से नीचे वाला कॉकरोच परजीवी दिखाई नहीं देता। 
इंदिरा गांधी और राकेश शर्मा का संवाद हुए 4 दशक से अधिक समय बीत चुका है। भारत देश की शासन व्यवस्था लोकतंत्र से तब्दील होकर प्रजातंत्र बन चुकी है और राजा को प्रजा कैसी नज़र आती है सबको पता है। आंदोलन करने वालों को परजीवी कहा गया था, किसानों को देशद्रोही बताया गया था, हड़तालों से है जान को कहा गया था। यह सब हमारे कानों ने इन्हीं चार पांच सालों में सुना है। मताधिकार को हम संवैधानिक अधिकार मानते थे पर अब ऐसा नहीं है। यह एक ऐसा सिलेक्टिव अधिकार है जिससे हमें वंचित किया जा सकता है। वंचित होने वालों की संख्या 1-2 हजार नहीं लाखों में हो सकती है। पहले मतदाता सरकार चुनते थे अब न्यूनॉर्मल के तहत सरकार मतदाता चुनौती है और अपने मन माफिक परिणाम प्राप्त करती है। जब व्यवस्था के बाहर का व्यक्ति कॉकरोच नजर आने लगे तब ऐसा मानने वालों को एक बात याद रखना चाहिए काला, लाल, पीला, नीला कोई भी केमिकल का स्प्रे कीजिए वैज्ञानिक तथ्य बताते हैं कॉकरोच है सदा के लिए... और व्यवस्था में बैठे व्यक्ति हमेशा वहीं बैठ नहीं रह सकते।