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जीएसटी 2.0 जल गई अर्थव्यवस्था का इलाज बरनोल से नहीं होगा

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बिलासपुर, 16 सितंबर 2025। 
काला धन वापस लाने की चर्चा के साथ इस देश में चुनाव लड़ा गया। किसके पास काला धन है किसका है कहां है यह बताने का दावा एक नेता ने उसी तर्ज पर किया जैसा बीपी सिंह ने बोफोर्स दलाली के नाम बताने के मामले में किया था। राजा नहीं फकीर है देश की तकदीर है बाद में नारा चला राजा नहीं फकीर है देश का बवासीर है। यह कहानी फिर से दोहराई जा रही है। पिछले 10 सालों में काला धन तेजी से बढ़ा और कल से सफेद हुए एण्ड में आम भारतीय नागरिकों को जीएसटी का 2.0 का झुनझुना शाकुलेश प्राइस शांतावना प्राइस के रूप में दे दिया। 24 - 25 के आंकड़े बताते हैं भारत से 1946 करोड रुपए बाहर गए इसमें से 60% टैक्स हेवन कंट्री में गए, सिंगापुर में 22%, मॉरीशस 19.9%, यूएई 9% प्रतिशत, नीदरलैंड 7% मोदी जी ने सत्ता संभालने के बाद नियमों में कुछ ऐसे बदलाव किए की बड़े कॉर्पोरेट को काला धन सफेद करने और देश का पैसा विदेश ले जाने और फिर वापस लाने की खूब सुविधा मिली। उन्हें कारखाना डालने की जगह गिफ्ट फ्री सिटी में एक दफ्तर मात्रा खोलना बेनामी संपत्ति एक्ट में जो परिवर्तन हुआ वह अंतिम लाभार्थियों का नाम बताने से बचा देता है।
2012-13 में भारत ने कुल टैक्स कलेक्शन में कारपोरेट की साझेदारी 3.5% है लेकिन मोदी युग के काल में 2024 में यह हिस्सेदारी घटकर 2.7% हो गई। जब कॉर्पोरेट कंपनी को इतनी सुविधा दे रहे हैं तो कल टैक्स कलेक्शन में उनकी हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए पर यहां तो घट गई। असल में नियमों को इस तरह बदल गया 17 वे जीएएआर शेयर मार्केट में नाम छुपा के शेयर खरीदने का नियम ढीला किया गया। उद्योग को विस्तार के नाम पर सिंगल विंडो दिया गया। एक्सईजेढ के नियम बदले गए जो पैसा भारत से विदेश गया था सेल कंपनियों के माध्यम से गिफ्ट सिटी और एक्सईजेढ में लगा और इस पेज पर 10 साल तक कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा बना दिया गया इसी बीच इलेक्ट्रोल बांड की योजना आई और इस बांड का सर्वाधिक लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिला। जमानत के सौदे किस तरह इलेक्ट्रोल बांड के आड़ पर किए गए क्रोनोलॉजी बताती है। भारत में उद्योग नहीं लगाना है केवल सेल कंपनियों के नाम पर दफ्तर खोलना है और कुछ उत्पादन नहीं करना है चलते बनना है। अब तो यह रोग छोटे शहरों में पहुंच गया है पैसे से पैसा कमाया जाता है अधिकतर गवाया जाता है। ईडी कभी ऐसे लोगों को नहीं पड़ती पकड़ भी नहीं सकती नियम इस तरह बदले गए। इसी चक्कर में पूरा बाजार हाहाकार कर रहा है जीएसटी घटाकर जले हुए शरीर पर बरनोल लगाई जा रही है।