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हॉल मार्क के नियमों में दर्जनों छेद, अमानक आभूषण बेचो ग्रामीण क्षेत्रों में

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समाचार -
बिलासपुर, 12 अप्रैल 2023। 2021 में स्वर्ण आभूषणों के धंधे को नियमों में लाने के लिए केंद्र सरकार ने बहुत से कानून बनाएं तभी यह तय हो गया था कि बगैर हॉल मार्क स्वर्ण आभूषण ना तो बनेगा और ना ही बिकेगा। एक-एक करके ऊपर से नीचे की ओर नियम सख्त होते गए। आखिरकार बिलासपुर जैसे शहर भी इस दायरे में आ गया पर सराफा व्यवसाई कहां नियम मानता है। सूत्र बताते हैं जैसे-जैसे नियम लागू हुए वैसे वैसे सर्राफा ने अपने कारोबार का तरीका बदला। कुछ दुकानदारों ने सोना चांदी आभूषण ग्रामीण क्षेत्रों में फेरी लगवा कर बिकवाना शुरू किया। लोग बताते हैं कि सर्राफा में कुछ ऐसे दुकानदार हैं जिनके काउंटर केवल दिखावा हैं उनकी असली दुकानदारी तो फेरी वालों से ग्रामीण क्षेत्रों में आभूषण की बिक्री है। ऐसे में पूरे अमानक आभूषण आराम से ग्रामीण उपभोक्ताओं के बीच खपाए जा रहे हैं। यहां एक बात और ध्यान देने योग्य है कि बिलासपुर जिले से सर्वाधिक पलायन मस्तूरी क्षेत्र से होता है और फेरी लगाकर आभूषण बेचने का काम भी सर्वाधिक मस्तूरी क्षेत्र में होता है और यह पूरा माल बगैर बिल के बेचा जाता है इतना ही नहीं बिलासपुर के सर्राफा का दो नंबर का लिंक राजधानी रायपुर के सर्राफा से है जानकार यह भी बताते हैं कि प्रतिदिन 4 लोग दो 2 किलो का स्वर्ण आभूषण लेकर बिलासपुर सर्राफा आते हैं और यह सब काम भी बगैर बिल के होता है। इस चोरी के धंधे पर ना तो जीएसटी ना आईडी कभी नजर देती है या ऐसा माने की जिस तरह भारत देश के मॉडल राज्य गुजरात में व्यापारी कभी चोर नहीं होता वैसे ही सर्राफा में कोई चोर नहीं होता सब चोर तो कोयले में है।