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डॉलर के मुकाबले कापता रुपए, अब रहा है लड़खड़ाने

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । जिस देश की सरकार ही राजनीति करने लगे उस देश की हालत वैसे ही होगी जैसी इन दिनों स्वयंभू विश्व गुरु यानी हमारी, हमसे ज्यादा मुद्रा स्थिति अमेरिका की है फिर भी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है और इस बीच एक और बुरी खबर रूस की 3 तेल कंपनियों ने भारत से होने वाली तेल करार तोड़ दिया है। सरकार राजनीति में उलझी है, और देश की जनता आर्थिक नीतियों में उलझ कर रह गई है। मोनेटाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन सबका एक ही मकसद है। बेचो नहीं तो कर्ज लो, भारत अपनी कुल जरूरत के क्रूड आयल का 30% सस्ते में रूस से लेना चाहता था पर ऐसा हो नहीं पा रहा अभी कच्चे तेल की कीमत 121 - 124 डॉलर प्रति बैरल चल रही है और इसके 140 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने की उज्जवल संभावना है। 8 साल में हमने ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों पर क्या किया. .... ? हमारी समृद्धिशाली अनसुनी परंपरा लगातार समृद्धि की ओर बढ़ रही है उसी का परिणाम तो कटुता और बढ़ती कटुता में देखा जा सकता है। ऐसा नहीं है कि आज के पहले हमारी आर्थिक स्थिति खराब नहीं हुई 90-91 में हुई 8-9 में हुई पर हम उबरे, क्योंकि सबके राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह माना कि हम परेशानी में हैं, यहीं से तो सुधार की गुंजाइश शुरू हो जाती है। पर अब तो हम नारों में जीते हैं पौंड, येन, ऑस्ट्रेलियन डॉलर, कैनेडियन डॉलर भी मुद्रा है किंतु ये मुद्राएं डॉलर के मुकाबले वैसे नहीं कांप रही जैसा हमारा रुपया काप रहा 2014 में 59 और 77.44 कापते कापते लड़खडाने लगा। हमारे एक्सपोर्ट - इंपोर्ट का घाटा 200 मिलियन डॉलर पर है। तेल आयात के कारण हमारे एक्सपोर्ट बिल पर 5 लाख करोड़ का बोझ है। हमारा देश अपनी तेल जरूरत को 10 देशों से पूरा करता है। जिसमें ईरान से सर्वाधिक तेल 172 हजार बिलियन डॉलर आयात किया जाता है। सऊदी अरब, अमेरिका, नाइजीरिया, यूएई, कुवैत, मेक्सिको, ओमान, ब्राजील और आखरी में रूस जिससे हम 13.50 हजार करोड़ बिलियन डॉलर के तेल बुलाते हैं रूस से जितना तेल हम लेते हैं वह हमारी तेल जरूरत का 2.13 प्रतिशत है 4 माह में डॉलर की बढ़ती कीमत से हमें 126 हजार करोड़ का नुकसान हुआ हमारी सरकार हमारे निजी निर्माता चेते ही नहीं, तेल तो चीन की भी जरूरत है। चीन विश्व का सबसे बड़ा तेल आयातक है पर उसकी मुद्रा येन जो 2014 में डॉलर के मुकाबले 9.53 थी उसमें से +2 का बदलाव हुआ यही हाल यूरो डॉलर, ऑस्ट्रेलियन डॉलर, पौंड का भी है। इससे उलट 8 साल में भारत के रुपए की स्थिति 59 से 77 पर आ गई है। महंगाई बढ़ेगी हमारा तेल का बिल बढ़ेगा, बैंक रिवर्स रेपोरेट बढ़ा देगा, ईएमआई बढ़ जाएगी, खर्च बढ़ जाएगी हमारे कुल एक्सपोर्ट मे सर्वाधिक एक्सपोर्ट एग्रीकल्चर प्रोडक्ट का है शो हमारे आयात की सूची राष्ट्र ऋषि की कृपा से खूब बड़ी है आने वाला समय और खराब से खराबतर है। एक राजनीतिक दल और सरकार सिर्फ दो लोगों को मजबूत बनाने पर आमादा है भाषणों में जनता के ढाई लोगों की पार्टी से आग्रह किया जा रहा है और सरकार सिर्फ दो लोगों को मजबूत कर रही है भारत ढाई के मुकाबले 2 को सौंपने के पथ पर हम 8 वर्ष से प्रस्टस्त है ं।