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अर्थव्यवस्था को कर देंगे चौपट, नहीं बना सकेगा कोई वैकल्पिक मॉडल

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। देश की पूरी अर्थव्यवस्था पहले पटरी से उतरी और अब तेजी से बर्बादी की ओर बढ़ रही है क्योंकि देश के केंद्र में जिस पार्टी का शासन है उसके पास अगले 10 साल और शासन करने का जो रोडमैप जो चुनाव जीतने का तरीका है उसमें मजबूत अर्थव्यवस्था जिसमें संविधान की प्रस्तावना के अनुसार लोककल्याण हो नहीं है। वह तो देश में 101 मंदिरों के इर्द-गिर्द 400 लोकसभा सीट का एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कर चुकी है जिस पर अन्य राजनैतिक दलों का ध्यान ही नहीं है उन्हें एक संप्रदाय विशेष का वोट चाहिए और उसी के इर्द-गिर्द है राजनीति करना है अर्थव्यवस्था में कोई दूसरा वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत न कर सके इसको रोकने के लिए पूरे नियम बने हैं कोई इस अवतार से बेहतर विकल्प कैसे दे सकता है यह मुझे बर्दाश्त नहीं। छत्तीसगढ़ के लोगों को 2002 की एक घटना याद करना चाहिए जब केंद्र की अटल बिहारी सरकार छत्तीसगढ़ के बालकों को बेचने पर आमादा थी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा मैं जिस भी कीमत पर बालको बिक रहा हो उससे एक रुपए ज्यादा में खरीदूंगा और राज्य सरकार इसे चलाएगी यह एक ऐसा प्रस्ताव था जो माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष तक गया था तभी विनिवेश मंत्रालय ने एक रास्ता निकाला। पावर का ट्रांसफर सरकार से सरकार के बीच नहीं होगा और केंद्र सरकार ने देश के समस्त सरकारी उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को रक्षा उद्योगों को बेचने का जो सिलसिला शुरू किया है उसे की पहली शर्त है कि पावर का ट्रांसफर सरकार से सरकार के बीच नहीं होगा तीन उदाहरण है। सबसे पहला केरल के एच एल एल जिसका मुख्यालय तिरुअनंतपुरम है। दूसरा उदाहरण आंध्र प्रदेश का है जहां पर एक यूनिट को खरीदने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने दिया है किंतु दीपम ने इन दोनों प्रस्तावों को खारिज कर दिया, अर्थ यह है कि मैं संभाल लूंगा नहीं संभाल नहीं सकता हूं और किसी को संभालने दूंगा भी नहीं क्योंकि यदि किसी ने संभाल लिया तो फिर मैं बदनाम होऊंगा नाकारा सिद्ध होउंगा अक्षम सिद्ध हो जाऊंगा इसलिए वैकल्पिक आर्थिक मॉडल बनने ही नहीं दूंगा । फेडरल स्ट्रक्चर को खत्म करूंगा राज्यों की आर्थिक व्यवस्था को स्वतंत्र नहीं बनने दूंगा जीएसटी के माध्यम से राज्यों को भिखारी बना कर रख लूंगा और राज्य केवल शराब से ही आय प्राप्त कर सके अन्य विकल्प बंद कर दूंगा यही है केंद्र सरकार की वर्तमान नीति ..... मंदिरों के आधार पर देश को देश की जनता को वोट देने के लिए तैयार करो वेदों की ओर लौट चलो हमारा कल्चर सर्वश्रेष्ठ है यह भावना भर कर अप्रवासी भारतीयों का सम्मेलन भी महाकाल की नगरी में करो क्योंकि वोट चाहिए और विदेशों में यदि कोई पत्रकार विदेश मंत्री से भारत की धर्मनिरपेक्ष नीति पर पूछ ले तो आई एफ एस पूर्व अधिकारी बड़े पाखंड से यह कह देता है कि भारत के संविधान में धर्मनिरपेक्षता सेक्युरिज्म जैसा कोई शब्द नहीं है अब जब बाहर ही यह कह दिया कि हमारा संविधान ही पंथ निरपेक्ष नहीं है तो देश की जनता को गदगद हो गई यह सोच कर कि विश्व में नेपाल के बाद भारत सबसे बड़ा हिंदू राष्ट्र बनेगा।