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समझे महंगाई किस तरह जेब को नहीं हम को बर्बाद कर रही है

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 30 मार्च 2022। आप कहेंगे महंगाई और स्वर कोकिला लता मंगेशकर का क्या संबंध है किंतु ऐसा है। भारतीय जनमानस को लता मंगेशकर की आवाज हमेशा अच्छी लगती रही अचानक कहीं से एक फिल्म आई जिसका नाम था निकाह और पान की दुकान से लेकर हाई क्लास रेस्टोरेंट, शादी, जन्मदिन, इंगेजमेंट सब जगह सलमा आगा की आवाज रिकॉर्ड तोड़ रही थी यहां तक कि उस समय बिनाता गीतमाला आती थी और उसके प्रथम तीन पायदान पर निकाह के गाने थे। सलमा आगा की आवाज ज्यादा दिन नहीं चली किंतु उनकी आवाज का एक गाना आज भी प्रासंगिक है। "दिल के अरमां आंसुओं में बह गए शायद उनका आखरी हो यह सितम सोचकर हम हर सितम सह गए"। महंगाई का बढ़ती बेरोजगारी का आज यही हाल है। महंगाई बेरोजगारी सिस्टम का हिस्सा बन गई महंगाई को आज हम एक नए तरीके से समझाते हैं। 2014 में जितना रुपए लेकर हम 1 किलो आटा खरीदते थे आज इतने रुपए में हमें मात्र 400 ग्राम आटा प्राप्त होगा, चावल 225 ग्राम प्राप्त होगा, 1 किलो आलू के स्थान पर 500 ग्राम प्राप्त होगा, तेल तो सिर्फ 100 ग्राम मिलेगा जबकि सरकार की रईसी में कोई अंतर नहीं है बिहार जैसा राज्य पूर्व एमएलए के पेंशन पर 5 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करता है वेतन वृद्धि 12 से 20% हुई है और महंगाई 105% से लेकर 300% तक बढ़ी है। 2014 में 1 लीटर पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.48 पैसे थे आज ₹32. 90 पैसे हैं। डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3.56 पैसे थे आज ₹21है. 31 पैसे हैं , और जी सिनेमा हमें हर दूसरे दिन एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर पिक्चर देखने कह रहा है क्या अभी भी उसे यह समझ नहीं आता कि जनता के द्वारा हर हर मोदी घर घर मोदी की अपेक्षा एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के दिन हर हालत में आज से बेहतर थे सरकार की रहीसी को ऐसे समझें। पेट्रोल डीजल पर दाम बढ़ने से सिंचाई तक महंगी हो गई, केंद्र सरकार 16 करोड़ 63 लाख वसूल लेता है और स्टेट 12 लाख 38 हजार करोड़ रुपए वसूलता है । यदि सरकार ने अपना गवर्नेस ठीक नहीं किया तो अंतिम विकल्प पानी पर वेट और एक्साइज ड्यूटी लगानी ही बचेगी। पेट्रोल डीजल और शराब से सरकार अपनी कुल कमाई का 50 प्रतिशत जुगाड़ कर लेती है और इस लूट के बाद भी यदि सरकार का पेट नहीं भर रहा है तो अब पानी पर कमाई ही एकमात्र विकल्प है । 2014 में $1 58 से ₹60 था अभी ₹78 है मतलब 15 से 20 % रुपए का अमूल्यन हो गया सरकार माननीय पूर्व सांसदों को पेंशन के लिए 205 करोड़ खर्च करती है अन्य सुविधाओं पर 700 करोड़ खर्च कर देती है। देश में पेंशन पाने वाले पूर्व एमपी 1500, एमएलए 18000, और परिवार पेंशन पाने वालों की संख्या 9000 है। इनके पेंशन को मेज थपथपा कर पास कर दिया जाता है। अब महंगाई पर फिर नजर डालें 2021 में 2 करोड लोगों की नौकरी चली गई स्कूल की फीस में 105 % वृद्धि हुई कॉलेज की फीस में 300% खाद्य तेल की कीमतों में 300% वृद्धि हो चुकी है जबकि वेतन 12 से 20% ही बड़ा है सरकार 80 करोड़ लोगों को जिस मुफ्त अनाज की बात करती है उस पर खर्च होने वाली राशि पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी से मात्र 1 साल में वसूल हो जाती है। शीघ्र ही जनता ने यदि महंगाई को घटती ब्याज दर को बैंकों के निजीकरण को अपना मुद्दा नहीं बनाया तो अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन की किसके लिए होगी. .....?