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महिला एवं बाल विकास विभाग का भट्ठा बैठाने के बाद अधिकारी चले शिक्षा विभाग की ओर

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर - हेडिंग पढ़कर आश्चर्य लग सकता है किंतु यह बात बिलासपुर महिला एवं बाल विकास दफ्तर की अधिकारी नेहा राठिया पर पूरी तरह से ठीक उतरती है। बताते हैं कि उनका चयन उप कुलसचिव पद के लिए हो गया है, इसका सीधा अर्थ है की महिला एवं बाल विकास विभाग में रहते हुए उन्होंने जो कुछ भी आर्थिक अनियमितताएं की उस पर पर्दा ही पड़ा रहेगा । क्योंकि जिस पूर्व अधिकारी सुरेश सिंह के साथ मिलकर श्रीमती राठिया ने गड़बड़ी की थी उन पर आज तारीख तक जांच का आदेश नहीं आया है। सिविल सेवा आचरण अधिनियम के तहत क्या यह ठीक नहीं होता कि पहले आर्थिक अनियमितता की जांच होती उसके बाद दोषी न पाए जाने के बाद उन्हें नौकरी छोड़ने की अनुमति मिलती बताया जाता है कि जिले में संचालित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह प्रभारी अधीक्षक के साथ मिलकर इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल, सामानों के साथ ही फिनाइल, एसिड, साबुन, तेल, मंजन जैसी चीजें एक ऐसे व्यापारिक संस्थान से खरीदी जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसी तरह खाद्यान्न क्रय ने भी 28 लाख रुपए का भुगतान गलत तरीके से हुआ है। भवन रिपेयरिंग का काम निजी ठेकेदार से कराया गया और 40% कमीशन खाया गया। संस्था में अपराधिक मामलों में लाए गए नाबालिक को जमानत दिलाने के नाम से लंबी रकम ऐठी जाती है, बालिका गृह की अधीक्षक लगातार 18 वर्षों से जमी हुई है, एक ही वित्तीय वर्ष में डेढ़ करोड़ का घोटाला इन के नाम पर है। पड़ोस स्थित गुप्ता मेडिकल इनकी पसंदीदा दुकान है ऐसा लगता है कि सिंह एंड कंपनी का काॅकस महिला एवं बाल विकास विभाग को पूरी तरह कब्जे में रखता है।