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असहाय नागरिकों से भरें लोकतंत्र को सभ्य कैसे मान ले ?

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बिलासपुर, 13 अगस्त 2026। 
एक बार फिर से 15 अगस्त आने को है अर्थात स्वतंत्रता दिवस पर किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक देश के नागरिक की और सहायता ऐसी नहीं होगी जैसे भारत के महान नागरिकों की है। लगता तो ऐसे है कि राजा जनता की सुनने के लिए जिला मुख्यालय से लेकर दिल्ली तक बैठे हैं। भगवानों के दरबारों का नाम कुछ भी रख लिया जाए पर सनवाई है कहां यह स्थिति कई दिन से है। पहले लगता था कि चुनाव के पहले नेट तो सुन लेता है क्योंकि उसे जनता से वोट चाहिए होता है पर अब ऐसा नहीं है। पार्षद, विधायक, सांसद में से किसने अपने चेहरे पर वोट मांगा जब उन्होंने अपने चेहरे पर वोट ही नहीं मांगा तो आपकी सुनेगा क्यों.... और नागरिक उसे सुनाइए क्यों.... यह पूरा परिदृश्य अद्भुत है। जनता अब किसकी कॉलर पकड़े जिसको वोट दिया उसकी या जिनकी शक्ल पर वोट दिया उसकी। जब हम चमत्कार के नाम पर वोट देते हैं तो यही होता है। 
वोट की ताकत से लैस भारतीय नागरिक की अब नागरिकता भी खतरे में है। और वोटर बनने के लिए उससे जो कागज मांगे जाते हैं उनका जुगाड़ आसान नहीं है। देश में एक भी संस्था ऐसी नहीं जहां जनता की मदद हो जाए। जनता की मदद के नाम पर वो संस्थाएं अंत में व्यवस्था के ही काम आती है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने बिलासपुर सीपत थाने में हिरासत में मौत पर सीबीआई जांच का आदेश दिया और सरकार से कहा मृतक के परिवार को अंतरिम राहत के रूप में 25 लाख रुपए दो, सरकार ने₹100000 दे रखा था। तो सर यह है कि पहले संस्था के पास गए अपने प्राण गंवाए फिर परिवार व्यवस्था के चक्कर काटे अंत में एक आदेश मिल गया पर 25 लाख रुपए कब मिलेगा नहीं पता। 
यह सब कुछ जो हो रहा है अनायास नहीं है देश में 5 करोड़ से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं आम नागरिकों के लिए उपभोक्ता अदालतें हैं लेकिन वहां उपभोक्ता से ज्यादा रहता कंपनी को मिलती है। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा रोकने के लिए आयोग बना है पर प्रतिस्पर्धा की जगह कंपनियों का एकाधिकार बन गया है। कलेक्टर कब जिलाधीश बन गया उसे पता ही नहीं चला कई जिलों में तो कलेक्टर नहीं जिला अध्यक्ष विराजमान है। और जिला अध्यक्ष हेतु राजनीतिक पार्टी का होता है। छत्तीसगढ़ में रोज देखने में आ रहा है ग्राम पंचायत की स्थिति शून्य है और कंपनियां मजा कर रही है। अंबिकापुर से इन दोनों एक विज्ञापन यूट्यूब पर दिखाई देता है जिसमें एक डॉक्टर साहब क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्या के संबंध में पूर्व वर्तमान और वर्तमान के बारे में बताते हैं और अचानक उनके मोबाइल पर मैसेज आता है और वे अदानी की एंबुलेंस में बैठकर निकल जाते हैं मरीज को देखने। 
हसदेव अरण्य क्षेत्र में इस कंपनी ने पेड़ों का जो कतले आम किया हजारों प्रजाति के जीवों का जीवन संकट में डाला खत्म कर दिया उसके मैसेज किसके मोबाइल पर गए और कितनी एम्बुलेंस दौड़ाई गई इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है।