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कर्जा ले रहे हैं कर्जा पटाने के लिए, सीता की महिमा कौन जाने

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बिलासपुर, 31 जुलाई 2026। 
भारत सरकार के पास विकास कामों के लिए अब पैसा नहीं है और ये हम नहीं खुद सरकार ने अपने जवाब में कह दिया। आज 81.8% नया कर्ज पुराने ऋण पर ब्याज चुकाने के लिए लिया जा रहा है। 2021-22 में 50.9 फ़ीसदी नया ऋण ही इस मकसद से लिया गया था। 5 साल में 31% वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार पर कुल कर्ज 2021-22 में 138.66 लाख करोड रुपए था जो अब बढ़कर 2025-26 में 201.17 लाख करोड़ हो गया यह आंकड़ा केंद्र ने खुद संसद में दिया है। 
अब चिंता का सबसे बड़ा पहलू यह है कि नया कर्ज का इस्तेमाल क्या हो रहा है तो जवाब है पुराने श्रण के ब्याज चुकाने में, कर्ज का इस्तेमाल पुराने श्रण एवं ब्याज को चुकाने अथवा तात्कालिक उपभोग के लिए हो रहा है तो भावी वीडियो का हित बली चढ़ गया। 81.8% नया कर्ज पुराने श्रण पर ब्याज चुकाने के लिए चला गया तो विकास योजना के लिए क्या बचा। सरकार पूंजीगत व्यय जैसे हाईवे, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डा तो शिक्षा , स्वास्थ्य, अनुसंधान जैसी मदो पर बहुत बड़ी कटौती हो चुकी है। भारत में प्रति व्यक्ति औसतन कर्ज 1. 36 लाख करोड़ हो गया है। तो सरकार आर्थिक कुप्रबंधन में फंस चुकी है। महंगाई 8 से 10% होलसेल में बड़ी है, 5% कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में बड़ी है। इस तरह देखे तो देश की जीडीपी 3 से 4% रहेगी और सरकार कुछ नया फंडा करके जीडीपी को बढ़ता हुआ दिखाइए। 17 जुलाई एक दिन में आरबीआई ने 676 बिलियन झोंका रूपए को संभालने के लिए इस तरह रुपए की गिरती शाख को बहुमूल्य डॉलर लगाकर कब तक बचाएंगे। भारत में आम व्यक्ति की हालत का अंदाज इस तरह से लगाया जा सकता है कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार आम व्यक्ति 18 लाख करोड रुपए का गोल्ड लोन लिया है। गोल्ड लोन में तेजी से वृद्धि हुई है और खाते बताते हैं कि गोल्ड लोन छुड़ाने में अब लोगों की हिम्मत नहीं है।