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बिजली विभाग की अकूत कमाई, सीएम ही अपने पास क्यों रखते हैं इस मंत्रालय को

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बिलासपुर, 30 जून 2026। 
छत्तीसगढ़ में इतना कोयला उत्पादन होता है कि छत्तीसगढ़ के कोयले से अन्य प्रदेशों की बिजली जरूरत है पूरी होती है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से बिजली की दरें महंगी हो गई प्रति यूनिट 50 पैसे से लेकर₹3 तक का अंतर देखा जाएगा। हम केवल सामान्य उपभोक्ता घरेलू विद्युत दर की बात कर रहे हैं। व्यावसायिक बिजली की दरें अलग है। क्या आपने कभी अपना बिजली बिल देखा है कि उसमें प्रति यूनिट के अतिरिक्त और आपसे किस-किस मध्य में पैसा लिया जाता है सीधे शब्दों में की आपकी जेब बिजली विभाग कहां-कहां से काटता है। मीटर का किराया आपको ही देना है जबकि बिजली कनेक्शन लेते समय मीटर का पैसा आप जमा कर चुके हैं। महीने में आपके घर की बिजली बिगड़े या ना बिगड़े पर मेंटेनेंस चार्ज हर महीने आपसे लिया जाता है। इस बिजली बिल में व्हीसीए भी लिया जाता है ऊर्जा विकास उपकर भी लिया जाता है। पर्यावरण को पहुंचने वाली छती की भरपाई भी आप ही से ली जाती है। सामान्य उपभोक्ता के नाते हम जानते हैं कि हमारे मोहल्ले में कितनी लाइन केवल और सर्विस वायर कब से नहीं बदले गए पर हमसे हर महीने उनके मेंटेनेंस चार्ज लिया जाता है। 
बिलासपुर में एक आंकड़े के मुताबिक हर महीने मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों का कलेक्शन है और विभाग कितना मेंटेनेंस करता है यह आप और हम स्वयं जानते हैं। ऊर्जा विभाग की लूट आज की बात नहीं है यह हमारी सनातन संस्कृति के समान विरासत में प्राप्त हुई है और यह गुण विभाग के अधिकारियों को मध्य प्रदेश शासन के समय से शक्ति भवन से प्राप्त हुआ है। खंबे पे जब सिल्वर पेंट होता था तब भी और आज जब सीमेंट का खंबा लगता है तब भी ऊर्जा विभाग का भ्रष्टाचार सतत जारी है और सबसे बड़ी बात ऊर्जा विभाग में भ्रष्टाचार की अविरल धारा इतनी तेज है कि इस विभाग को मुख्यमंत्री हमेशा अपने पास रखता है। 2001 से 2026 तक का छत्तीसगढ़ का राजनीतिक इतिहास है कि प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी उसके बाद 15 साल डॉक्टर रमन 5 साल भूपेश बघेल और अब साय साय वाले विष्णु देव किसी ने भी ऊर्जा विभाग को किसी अन्य के पास नहीं जाने दिया।