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बेपर्दे की बेशर्मी का मजा लीजिए

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बिलासपुर, 18 जून 2026। 
लोकतंत्र में लोक लाज का पर्दा तो बहुत दिन पहले उतर जा चुका था अब बेपर्दगी कहां तक जाएगी इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। क्योंकि प्रधान राज मैं राजनीति बेतूकेपन का रंग मंच बन गई है। और यही भारत के लोकतंत्र की हकीकत है। एक राजनीतिक दल इसके बारे में कुछ कहा सुन नहीं गया जिसे चुनाव में 1000 बोर्ड भी हासिल नहीं हुआ उसके लोकसभा सांसदों की संख्या 20 हो जाए यही तो भारतीय राजनीति का बेतूकेपन है और इस बेतूकेपन का नाम है। नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया और सुना तो यहां तक जाता है कि इस पार्टी के कुछ सांसद मंत्री भी बन जाएंगे। असल में भारत में दल बदल कानून है का सिर्फ एकेडमिक महत्व है और यह बात राज्यसभा चुनाव मध्य प्रदेश के संदर्भ में समझी जा सकती है। 
बिहार में सत्ताधारी एनडीए के दो घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखने के लिए संवैधानिक प्रावधान को जैसे धत्ता बताया गया वह काम और अमर्यादित नहीं है। वे बगैर विधायक बने 6 महीने तक मंत्री रहे फिर उन्होंने इस्तीफा दिया और दोबारा फिर से मंत्री बन गए 6 महीने के भीतर विधायक बनने की अनिवार्यता इस नियम का इस तरह बलात्कार किया गया है यह सब खुले आम डंके की चोट पर हो रहा है कहते हैं प्रधान हैं तो मुमकिन है। लोकतंत्र में लोक लाज का पर्दा उतार चुका है बेपर्दे की बेशर्मी का मजा लीजिए।