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पीएनबी और लाला लाजपत राय
- By 24hnbc --
- Friday, 18 Nov, 2022
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समाचार :-
बिलासपुर, 19 नवंबर 2022। देश का वर्तमान नेतृत्व जिस तरह से राष्ट्रीयकृत बैंकों को बेचने में लगा है उनकी कुछ कहानियां नई पीढ़ी को याद रखनी चाहिए। पंजाब नेशनल बैंक का संबंध ना केवल देश की आजादी से है बल्कि इसके प्रारंभ होने के पीछे लाला लाजपत राय की भूमिका मुख्य थी। उन्होंने ना केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में बड़ी भूमिका अदा की साथ ही देश को आर्थिक तौर पर मजबूती देने वाला काम भी किया। पंजाब नेशनल बैंक 19 मई 1894, 14 शेयर धारक और 7 निर्देशकों के द्वारा शुरू हुआ था। आज यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है। पीएनबी की कल्पना एक स्वदेशी बैंक के तौर पर हुई थी जिसमें पूरी तरह से भारतीयों की पूंजी लगी थी, जिसका पूरा कमांड भारतीयों के हाथ में था। बैंक का पहला प्रोस्पेक्ट उर्दू के अखबार अखबार ए आम और पैसा मैं छपा था। 23 मई 1894 को संस्थापकों ने पीएनबी की पहली बैठक अध्यक्ष दयाल सिंह मजीठिया के लाहौर स्थित मकान में की थी। 12 अप्रैल 1895 को वैशाखी के 1 दिन पहले बैंक कारोबार के लिए खोल दिया गया था। लाला लाजपत राय दयाल सिंह मजीठिया, लाला हरकिशन लाल, लाला लालचंद, काली प्रसन्ना, प्रभु दयाल और लाला ढोलना दास सक्रिय तौर पर जुड़े थे। अब इस बात पर विचार करें भारतीय अर्थव्यवस्था में और स्वतंत्रता आंदोलन में जिस बैंकिंग सेक्टर का इतना महत्वपूर्ण रोल है उसके साथ ठगी करके कौन बच रहा है, और ठगी को मर्जर के द्वारा ठीक करके जो व्यवस्था बैंकिंग सेक्टर को फिर से पूंजीपतियों के हाथ में बेच देना चाहती है वह किस चेहरे के साथ आजादी का अमृत उत्सव मनाती है।


