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केचुए के राज में हमको कह गए बिचोलिया

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बिलासपुर, 18 जूलाई 2026।
देश की अधिकांश आबादी ग्रामीण है और जिसे सयाने लोग जिस पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बता गए वह बिचोलिया है। पहले थोड़ा बहुत कपड़ा कट जाता था तो हम लोग रफू कर लेते थे। पर अब तो मामला पैयबंध लगाने से भी आगे निकल गया है। जब हमको भारतीय विदेश सेवा का अधिकारी बिचोलिया का देता है तो याद आता है कि इस पेज में क्यों आए थे। और क्या अब बिचोलिया ग्रुप से बाहर निकल जाएं। आखिर एक विदेशी अधिकारी की यह हिम्मत कहां से आती है कि वह अपने देश के मीडिया को बिचोलिया कहता है इसी संवर्ग से निकले जो अब विदेश मंत्री हैं ने कहा था पाकिस्तान दलाल है। और अब उन्हीं के जूनियर कह रहे हैं कि भारत देश का मीडिया बिचोलिया है। शायद वो पूरे मीडिया को ही गोदी मीडिया समझ बैठे और बड़ी आसानी से कह दिया कि बिचोलिया है। इसी सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात कर डाली उन्होंने कहा कि मीडिया के लिए बहुत जल्द ही नियम और कानून बनाए जाने चाहिए वे आगे कहते हैं कि इस पेसे में चाहे जो एक मोबाइल और माइक लेकर कूद जाता है और फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कहते हैं। उन्हें यह तो पता ही होगा कि भारतीय संविधान में मीडिया की आजादी का व्यवस्था अलग से नहीं है। अभिव्यक्ति की जो स्वतंत्रता आम नागरिक को है वही स्वतंत्रता मीडिया को भी है। असल में दिल्ली हाई कोर्ट के वह जज साहब सरकार को कह रहे हैं कि मीडिया को नियंत्रित करने के लिए नियम बना दो, आखिर हमारे सामने जो साथी इस पेसे से जुड़े हैं वे लिखने के पहले अपने शब्दों पर कितना नियंत्रित करते हैं जब हम यह सोचते हैं तो पता चलता है कि स्वनियंत्रण का पालन करने वालों की संख्या बहुत से ज्यादा है। उतावलापन कम में है ऐसे उतावले लोग तो हर पेसे में हैं। कुछ नजर आ जाते हैं कुछ बच जाते है। मूल बात यह है कि हमको कोई बाहर से आकर सुधरे उसके पहले हमको अपने पर नियंत्रण खुद ही रखना होगा और यह देखना होगा कि हमारा लिखा पड़ा उसे दायरे में रहे जिसे हम संविधान कहते हैं। रही बात बिचोलिया होने की जो है वह स्वयं हुआ। तभी तो कहा जाता है उन्होंने झुकने कहा था और हम रहने लगे