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डायोसिस ही तोड़ने में लगा है समाज को

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बिलासपुर, 30 नवंबर 2025। 
छत्तीसगढ़ की चुनावी राजनीति में ईसाई समाज के मतदाता प्रभावशाली संख्या में मौजूद हैं और इसी कारण छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत और डिसायपल्स के बीच चल रही राजनीति अपने आप में महत्वपूर्ण हो जाती है यह किसी से छिपा नहीं है कि ईसाई समाज की समितियां के झगड़ों के कारण चर्च अल्पसंख्यकों की स्कूल, अस्पताल की लीज खतरे में है। सीधा समझ आने लगा है की इसी समाज के भीतर अपंजीकृत आरएसएस के मुखोटे अब ऐसे कृत कर रहे हैं जिससे सरकार परोक्ष रूप से और भाजपा अपरोक्ष के रूप से लाभान्वित हो।
जबकि सीआफसी की वैधानिक मान्यताप्राप्त समिति का गठन किया जा चुका है, कुछ दिनों पहले ही डिसायपल्स के कन्वेंशन ऑफ़ चर्चेस के वार्षिक अधिवेशन का आयोजन
डिसायपल्स के सबसे प्राचीन व वरिष्ठ पासबान रेव्ह.अजीत नाथ के मार्गदर्शन में तखतपुर में किया गया। जहां पर नई वैधानिक कमेटी का गठन किया गया श्री मेन्जी प्रसाद अध्यक्ष व रेव्ह.अतुल आर्थर कार्यकारी सचिव बनाये गए। 
तब अधिवेशन के दिन छत्तीसगढ़ डायोसिस के पदाधिकारीयो ने अपने आपको सीआफसी से न सिर्फ किनारा किया बल्कि, डिसायपल्स के सारे पासबानो और कलीसिया के अन्य लोगों को इस सम्मेलन में जाने से रोका। वार्षिक अधिवेशन दिनाँक 8 नवम्बर को होने के बाद आखिर किस बात का डर डायोसिस को सताने लगा जो पेरेलल सीआफसी बनाया गया ? यह पहली बार नही है कि डायोसिस द्वारा सीआफसी की मीटिंग में पासबानो और अन्य को रोका गया, इससे पहले 2 अक्टूबर 2025 को बिलासपुर में निर्धारित वार्षिक आमसभा को भी आयोजित करने से डायोसिस द्वारा रोका गया था। जिससे तिथि आगे बढ़ाकर 8 नवम्बर रखा गया था, उसे भी प्रभावित व असफल करने के लिए बिलासपुर में ठीक उसी समय पर पास्ट्रेट कमेटी की मीटिंग रख दी गयी, ये सोचकर कि वार्षिक आमसभा नही हो पाएगी, पर इनका षडयंत्र काम नही आया वार्षिक आमसभा सफलता पूर्वक आयोजित हुई।
पर इनकी हताशा देखिए अब उनको भी समाज से बहिष्कृत करने की धमकी दी जा रही है जो अधिवेशन में शामिल हुवे। 
डायोसिस का षडयंत्र है डिसायपल्स की कलीसियाओं को तोड़ना ?
पूर्व में डायोसिस व उनके चापलूस पासबान लगातार सीआफसी की बुराई करते नहीं थकते थे अब आखिर सीआफसी नाम से पैरेलल सीएफसी बनाने के लिए आदरणीय बिशप मैडम को बिलासपुर आना क्यो पड़ा ? बिशप एवं पदाधिकारीयो का बिलासपुर आना डिसायपल्स की मंडलियों में फूट डालने और राज करने का खुला षड्यंत्र है, यह पूरा समाज देख और समझ रहा है। कलीसिया में फूट डालकर ही अपनी तानाशाही और दादागिरी कायम रखने, और मंडली के पैसों का बंदरबांट करते रहना मूल उद्देश्य है। जब से मंडली के लोग इनके अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने लगे है इनको डर है कि इनकी दुकानदारी बन्द न हो जाय, इसलिए ना चाहकर भी इनको सीआफसी की पेरेलल बॉडी बनाई जा रही है, ताकि हम आपस मे झगड़ा करते रहें।
 पंजीकृत सीआफसी (1942) कभी सीएनआई(1970) में मर्ज (विलय) नही हुआ सिर्फ मंडली के हित में ज्वाइन (सम्लित) किया गया था। पर मंडली का हित छोडकर कलीसिया के 60% से स्वहित पूरा किया जा रहा है।